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Showing posts from June, 2025

।। भोजन नियम व रस।।

।। भोजन नियम व रस।। हमारे भोजन में रस होते है। इसीलिए हमारे भोजन को बहरस कहा जाता है। 1. अम्ल (खट्टा) 2. मधुर मीठा 3. लवण ( नमकीन 4. कटु कडुवा 5 तिक्त चरपरा 6. कषाय (कसैला) प्रत्येक रस का सेवन नियमित एवं सीमिति मात्रा में किया जाता है, अधिक या कम मात्रा में सेवन से विमारियां पैदा होती है। 1. मधुर (Sweet चीनी):  मधुर रस से मन में तृप्ति मिलती है। यह बात और पित्त का शमन करता है जबकि कफ को विकृत करता है। धातु एवं ओज की वृद्धि करते हुए ज्ञानेन्द्रियों को स्वच्छ रखता है। इस रस को अधिक सेवन करने से आलस्य व कम सेवन करने से कमजोरी महसूस होती है। 2. अम्ल (खट्टा Acid नीबू):  अधिक सेवन से मुंह व गले में जलन उत्पन्न करता है। यह मुंह से लार की उत्पन्न करता है। यह वात का शमन करता है तथा पित्त एवं कफ को विकृत करता है। 3. लवण (नमक / पटु Salt): यह मुँह में डालते ही घुलता है. इसका अधिक सेवन जलन पैदा करता है। यह वात का शमन करता है। जबकि पित्त एवं काम की विकृत करता है। लवण की अधिकता से नपुंसकता, बांझपन, रक्तपित्त आदि विमारियाँ होती है। लवण के कमी से भोजन में अरुचि व पाचन क्रिया को प्रभावित करता ह...

सेल्स की रीसाइक्लिंग यानी ऑटोफैजी

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उपवास सेहत के लिए खास उपवास हमारी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा रहा है। लेकिन हाल में बीमारियों से लड़ने और सेहत को दुरुस्त रखने के लिए भी उपवास या लंबे समय तक भूखे रहने का चलन काफी बढ़ गया है। मेडिकल साइंस भी इसे स्वीकार कर रहा है। उपवास किस तरह बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकता है, बता रही हैं प्रियंका सिंह: सेल्स की रीसाइक्लिंग यानी ऑटोफैजी व्र त, उपवास या एक तय वक्त तक भूखे रहना क्या सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक परंपरा है या फिर यह फिट रहने और बड़ी बीमारियों से लड़ने में भी मदद करता है। मेडिकल साइंस के अनुसार उपवास न सिर्फ शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाता है, बल्कि खतरनाक और बीमार सेल्स को भी खत्म करता है। इस सोच को पहली बार ग्लोबल लेवल पर स्वीकार्यता मिली साल 2016 में, जब मेडिसिन का नोबल पुरस्कार टोक्यो इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में प्रफेसर योशिनोरी ओहसुमी को मिला। उन्हें यह अवॉर्ड सेल्स की रीसाइक्लिंग यानी ऑटोफैजी (autophagy) के लिए मिला। ऑटोफैजी एक बेहद जरूरी कुदरती बायोलॉजिकल प्रोसेस है, जिसमें शरीर के सेल्स या कोशिकाएं अपने भीतर मौजूद खराब, क्षतिग्रस्त या अनावश्यक हिस्सों ...