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आयुर्वेद में नाड़ी परीक्षा

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Nadi Pariksha - वात-पित्त-कफ का फील: उंगलियों से नाड़ी को समझने का आसान तरीका - आयुर्वेद में नाड़ी परीक्षा (Pulse Diagnosis) को एक बहुत बड़ा वरदान माना गया है।  इसकी मदद से सिर्फ बीमारी ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की पूरी शारीरिक और मानसिक स्थिति को समझा जा सकता है। नाड़ी के जरिए हम जान सकते हैं: शरीर में कौन सा दोष (वात, पित्त, कफ) बढ़ा हुआ है धातुओं (रस, रक्त, मांस आदि) की स्थिति कैसी है जठराग्नि (डाइजेशन) कैसा काम कर रही है शरीर के अंदरूनी अंगों की स्थिति क्या है और यहां तक कि व्यक्ति की भावनाएं और मानसिक स्थिति भी यानी आपकी उंगलियों के नीचे, पूरी बॉडी की “लाइव रिपोर्ट” मिल सकती है। सबसे पहले बेसिक समझ लो—हमारे शरीर में वात-पित्त-कफ लगातार बहते रहते हैं, जैसे ब्लड फ्लो करता है। इसलिए इनका एहसास भी हमें शरीर में कहीं ना कहीं मिलता है—और सबसे साफ जगह है हमारी उंगलियाँ। नाड़ी परीक्षा कैसे की जाती है नाड़ी जांचने के लिए हाथ और उंगलियों की सही पोजीशन बहुत जरूरी है। पुरुष (Male) - दाहिने (Right) हाथ की नाड़ी महिला (Female) - बाएं (Left) हाथ की नाड़ी जब हम नाड़ी चेक ...

सही डाइट 1

सुबह 8:00 बजे तक की डाइट वजन × 10 = कुल ग्राम वेजिटेबल्स एंड फट्स दोपहर का भोजन  दो प्लेट में ले  पहली प्लेट वजन × 5 = कुल ग्राम वेजिटेबल्स एंड फट्स दूसरी प्लेट  आप जो खाना चाहते हैं  शाम का भोजन   दो प्लेट में ले  पहली प्लेट वजन × 10 = कुल ग्राम वेजिटेबल्स एंड फट्स दूसरी प्लेट  आप जो खाना चाहते हैं  Agar bhookh Lage to Le sakte hain is prouds fruits vegetables dry fruits चार-पांच ghante bhi hone ke bad piskar.

Navel Displacement - नाभि खसकना

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Navel Displacement - नाभि खसकना: सच, भ्रम या आयुर्वेदिक लॉजिक? क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप डॉक्टर के पास गए हों और उनसे कहा हो – “डॉक्टर साहब, मेरी नाभि खसक गई है”? और जवाब में डॉक्टर ने बिल्कुल straight बोल दिया हो – “ऐसा कुछ नहीं होता, नाभि खसकने जैसी कोई बीमारी नहीं है”? यहीं से confusion शुरू होता है। क्योंकि दूसरी तरफ YouTube, Instagram, Facebook, हर जगह लोग बोल रहे हैं – नाभि खसक गई, नाभि बिठवानी पड़ी, मटका लगवाया, लोटा रखा, किसी ने धागा बांधा। अब सवाल उठता है - ये सच में कोई problem है या बस एक गलतफहमी? या फिर… दिक्कत नाभि की नहीं, किसी और चीज़ की है? इसी topic को हम आयुर्वेद के नजरिए से detail में समझने वाले हैं। नाभि खसकने पर लोगों को क्या-क्या दिक्कत होती है? जिन लोगों को लगता है कि उनकी नाभि खसक गई है, वो ज़्यादातर ये complaints बताते हैं: भूख बिल्कुल नहीं लगती बहुत ज्यादा गैस बनती है पेट में खिंचाव, फड़कन या कुछ “हिलता-डुलता” सा लगता है अपच, ढकार, पेट ठीक से साफ न होना वजन धीरे-धीरे कम होते जाना पेट के आसपास लगातार दर्द या भारीपन कुछ लोग ये भी कहते हैं कि...

श्वास के वैज्ञानिक नियम

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🌹श्वास के वैज्ञानिक नियम🌹 1- श्वास जीवन है।लेकिन लोग इसकी उपेक्षा कर देते हैं, वे इस पर बिलकुल ध्यान नहीं देते।लोग पूर्णता से श्वास नहीं ले सकते और तुम्हारे जीवन में जो भी बदलाहट आयेगी वह श्वास में बदलाहट द्वारा ही आयेगी।श्वास का विशेष ध्यान रखना होगा क्योंकि यह एक बहुत महत्वपूर्ण बात है।यदि तुम पूर्णता से श्वास नहीं ले रहे तो तुम पूर्णता से जी भी न सकोगे।तब तुम  पूरा वार्तालाप न करोगे;कुछ न कुछ बच रहेगा।एक बार श्वास ठीक हो जाये तो सब सही रास्ते पर आ जाता है।यदि  तुम वर्षों से गलत ढग से श्वास ले रहे हो, अथार्त उथला श्वास, तो तुम्हारी मांस-पेशियां जम जाती हैं। तब यह तुम्हारी इच्छा-शक्ति की बात नहीं रह जाती। यह ऐसा ही है कि कोई वर्षों से हिला-जुला न हो, उसकी  मांस-पेशियां सिकुड़ गयी हों; मृत हो गयी हों और रक्त जम गया हो। अब अचानक वह व्यक्ति लंबी सैर का विचार करे-तो केवल सोचने से यह घटित न होगा।अब उसे बहुत संघर्ष करना होगा। 2-श्वास की नली की मांस-पेशियां एक विशेष ढंग से बनी होती हैं और यदि तुम गलत ढंग से श्वास लेते रहे हो- और लगभग सभी लोग गलत ढंग से लेते हैं- तो...

नींद

नींद नई दिल्ली। जनवरी 2026 नींद है फिट रहने की हिट एक्सरसाइज़ फिट होने के लिए एक तरफ जहां डाइट पर काबू होना चाहिए, वहीं फिजिकल ऐक्टिविटी से भी भाग नहीं सकते। इनके साथ एक और तरीका भी है। वह है हेल्दी स्लीपिंग का। अगर हम अपना लक्ष्य 6-8 घंटे की अच्छी नींद की बना लें और इसे पा लें तो यह भी हमारे शरीर के ज्यादातर सिस्टम के दुरुस्त होने की निशानी है। ...तो फिर क्यों न 2026 को हेल्दी स्लीपिंग ईयर घोषित कर दें। एक्सपर्ट्स से बातकर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती आपको यकीन हो या न हो, लेकिन यह सच है कि सिर्फ अच्छी नींद लेने से ही शरीर फिट हो सकता है! कोई शख्स तभी गहरी नींद ले सकता है जब वह मानसिक और शारीरिक तौर पर फिट हो। दरसअल, जिस तरह किडनी हमारे शरीर में खून साफ करके वेस्ट प्रोडक्ट को बाहर निकालने में मदद करती है, वही काम नींद हमारे ब्रेन के लिए करती है। ब्रेन की सफाई अच्छी नींद में होती है। अगर नींद सही से नहीं लेते हैं तो दिमाग में कच़ारा जमा होने लगता है। इससे अल्जाइमर्स, डिमेंशिया जैसी परेशानी भी हो सकती है। गहरी नींद से ही मिलती है फिटनेस की मंज़िल हर बार नए साल पर इच्छा होती है कि ...

वात , पित्त और कब दोष का प्रधान निवास

वात , पित्त और कब दोष का प्रधान निवास  वात दोष का प्रधान निवास पक्वाशय माना गया है, इसलिए बड़ी आँत से जुड़ी सभी क्रियाओं पर वात का सीधा प्रभाव रहता है। मल का निर्माण, उसका संचय और निष्कासन वात के नियंत्रण में होता है। जब वात अपने स्वाभाविक स्थान पर संतुलित रहता है तब आंतों की गति सामान्य रहती है, परंतु वात के बढ़ते ही कब्ज, गैस, पेट फूलना और अनियमित मल त्याग जैसे लक्षण प्रकट होने लगते हैं। कमर, नितंब, जांघ और पैरों में वात की प्रधानता बताई गई है, इसी कारण इन भागों में दर्द, अकड़न, झनझनाहट, नसों में खिंचाव और कमजोरी अधिक दिखाई देती है। हड्डियाँ और जोड़ वात के विशेष क्षेत्र हैं, क्योंकि अस्थि धातु में शुष्कता और कठोरता होती है। जोड़ों का चरमराना, चलने में कष्ट और वृद्धावस्था में होने वाली समस्याएँ वात वृद्धि का संकेत मानी जाती हैं। कान भी वात का आश्रय है, इसलिए सुनाई देने की क्षमता, संतुलन और कानों में सीटी जैसी आवाज़ें वात विकृति से जुड़ी होती हैं। त्वचा का स्पर्श ज्ञान वात द्वारा संचालित होता है, अतः सुन्नता, संवेदना का कम होना या अधिक हो जाना वात असंतुलन के लक्षण बनते हैं। पित्त द...

स्यूसाइड कोई तुरंत उठाया गया कदम नहीं

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स्यूसाइड कोई तुरंत उठाया गया कदम नहीं, इससे पहले कई रेड फ्लैग नज़र आते हैं, जिन्हें पहचानना है जरूरी क्या आपका बच्चा उदास है? देखना होगा ये 10 लक्षण तो नहीं 10वीं के स्टूडेंट के ने बच्चों की मेंटल हेल्थ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसलिए पैरंट्स के साथ-साथ ये जरूरी है कि स्कूल में टीचर्स भी उनकी मनोस्थिति के बारे में जाने कि बच्चा किस दौर से होकर गुजर रहा है। हमारे लिए यह कहना आसान है कि मेरा पैर टूटा है मगर यह कहना कठिन है कि मेरा मन उदास है या मुझे घबराहट हो रही है, यह समझना जरूरी है। साइकॉलजी एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर हम अपनी खराब मेंटल हेल्थ को बयां करते हैं तो दूसरे को लगता है कि यह कमजोरी की निशानी है या यह बात करना वक्त की बर्बादी है, इसी वजह से बच्चे भी खुलकर अपनी बातें बता नहीं पाते। क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट डॉ मोनिका कुमार कहती हैं, मेंटल हेल्थ को एक सामान्य भाषा देनी जरूरी है। इसके लिए स्कूलों में काउंसलिंग, अस्पतालों क्लिनिक में काउंसलिंग की सुविधा जरूरी है और यह सुविधा है तो यह देखना भी जरूरी है कि कितनी बेहतर तरीके से चल रही है। स्कूल में काउंसलर है, मगर उस तक बच्चा ...