नींद

नींद
नई दिल्ली। जनवरी 2026

नींद है फिट रहने की हिट एक्सरसाइज़

फिट होने के लिए एक तरफ जहां डाइट पर काबू होना चाहिए, वहीं फिजिकल ऐक्टिविटी से भी भाग नहीं सकते। इनके साथ एक और तरीका भी है। वह है हेल्दी स्लीपिंग का। अगर हम अपना लक्ष्य 6-8 घंटे की अच्छी नींद की बना लें और इसे पा लें तो यह भी हमारे शरीर के ज्यादातर सिस्टम के दुरुस्त होने की निशानी है। ...तो फिर क्यों न 2026 को हेल्दी स्लीपिंग ईयर घोषित कर दें। एक्सपर्ट्स से बातकर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती

आपको यकीन हो या न हो, लेकिन यह सच है कि सिर्फ अच्छी नींद लेने से ही शरीर फिट हो सकता है! कोई शख्स तभी गहरी नींद ले सकता है जब वह मानसिक और शारीरिक तौर पर फिट हो। दरसअल, जिस तरह किडनी हमारे शरीर में खून साफ करके वेस्ट प्रोडक्ट को बाहर निकालने में मदद करती है, वही काम नींद हमारे ब्रेन के लिए करती है। ब्रेन की सफाई अच्छी नींद में होती है। अगर नींद सही से नहीं लेते हैं तो दिमाग में कच़ारा जमा होने लगता है। इससे अल्जाइमर्स, डिमेंशिया जैसी परेशानी भी हो सकती है।

गहरी नींद से ही मिलती है फिटनेस की मंज़िल
हर बार नए साल पर इच्छा होती है कि फिजिकल ऐक्टिविटी खूब करेंगे, ब्रिस्क वॉक करेंगे, हर दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज़ करेंगे, लेकिन इच्छाशक्ति हर साल कमज़ोर हो जाती है। अब चूंकि एक्सरसाइज़ नहीं कर पाते, डाइट भी सही नहीं रख पा रहे है, इन सभी की वजह से नींद की क्वॉलिटी भी खराब हो रही है या यों कहें कि अच्छी नींद नहीं आ रही, इसलिए सुबह उठना मुश्किल हो जाता है। दिनभर थकावट बनी रहती है यानी नींद का पैटर्न खराब हो रहा है। स्प्लीप पैटर्न को सुधार लें।

कम नींद से पेट भरने वाले हार्मोन नहीं कर पाते काम
हमारे शरीर में दो तरह के कंट्रोल काम करते हैं। एक न्यूरल और दूसरा हार्मोनल। न्यूरल क्विक रिस्पांस के लिए होता है और हार्मोनल कुछ धीमे रिस्पांस के लिए। भूख लगना, पेट भरने का सिग्नल पहुंचना, ये सब हार्मोनल रिस्पांस का हिस्सा हैं। भूख और पेट भरने में दो तरह के हार्मोन काम करते हैं।
1. Ghrelin (घ्रेलिन): इसे भूख बढ़ाने वाला हार्मोन कहा जाता है। जब हम देर रात जगते हैं या फिर नींद पूरी नहीं करते तो यह हार्मोन ज्यादा मात्रा में निकलता है यानी बढ़ जाता है और ज्यादा भूख लगती है। ज्यादा भूख लगने पर हम देर रात भी मंचिंग करते हैं। जंक फूड, मीठा आदि बहुत ज्यादा खाते हैं। आखिकार यह वज़न ही बढ़ाता है।
2. Leptin (लेप्टिन): यह पेट भरे होने का सिग्नल देने वाला हार्मोन है। जब हम जगे रहते हैं तो यह हार्मोन कम निकलता है यानी इसकी मात्रा कम हो जाती है। इससे दिमाग को पेट भरने का पता सही वक्त पर नहीं चलता और हम ज्यादा खा लेते हैं। ज्यादा खाना मतलब ज्यादा कैलरी लेना और अपना वज़न बढ़ा लेना। क्योंकि कैलरी अंत में फैट में ही बदल कर शरीर में स्टोर होती है।

कम नींद से मेटाबॉलिज़म भी हो जाता है स्लो
जब हम कम सोते हैं यानी नींद की कमी रहती है तो हमारे शरीर का मेटाबॉलिज़म भी धीमा हो जाता है। इससे कैलरी सही तरके से बर्न नहीं होती और कैलरी शरीर में ही स्टोर होने लगती है। यह बेली फैट के रूप में ही ज्यादा होती है।

स्लीप पैटर्न को समझने से नींद की क्वॉलिटी में सुधार
स्लीप स्टडी को पॉलिसोम्नोग्राफी (Polysomnography) भी कहा जाता है। यह सुविधा कई बड़े अस्पतालों में है और इस स्टडी को घर पर भी किया जाने लगा है। जिन्हें नींद न आने की परेशानी है, उन्हें अस्पताल के ही एक कमरे में अमूमन रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक सुलाया जाता है। उस शख्स की बॉडी पर कई तरह की डिवाइस लगी होती हैं जिनसे उसकी ब्रेन की ऐक्टिविटी, हार्ट बीट, सांस लेने का पैटर्न, ऑक्सिजन लेवल, मसल्स की ऐक्टिविटी, खर्राटे और सांस रुकना आदि सभी को मॉनिटर किया जाता है।

सूरज की रोशनी को पहचानती हैं हमारी आंखें
हमारे शरीर को जिस सिस्टम के तहत काम करना होता है, उसमें लाइट की अहम भूमिका होती है। उसे यह पता है कि रात बनी है सोने के लिए और दिन है काम करने या फिर ऐक्टिव रहने के लिए। यह तारतम्यता के साथ होता है और इसी को सर्केडियन रिदम कहते हैं। दूसरे शब्दों में शरीर की कुदरती बॉडी क्लॉक। यह बॉडी क्लॉक यानी शरीर की घड़ी 24 घंटे के चक्र पर आधारित होती है और सोने-जागने के क्रम को काबू में रखती है। ऐसा माना जाता है कि यह रिदम न सिर्फ नींद बल्कि शरीर के तापमान, हार्मोन निकालने, डाइजेशन जैसी चीज़ाें पर भी असर डालता है। हमारे शरीर में सभी बायोलॉजिकल प्रोसेस की एक साइकल चलती है। जब सुबह होती है और रोशनी रेटिना पर महसूस होती है तो रेटिना एक संदेश दिमाग को भेजती है। दिमाग जागने का संकेत देता है। नींद खुल जाती है।

नींद की क्वॉलिटी पता करने वाला डिवाइस
स्मार्ट रिंग्स और स्लीप ट्रैकिंग डिवाइस: ये नींद के पैटर्न को समझने और शरीर में ऑक्सिजन की उपलब्धता यानी सैचुरेशन को पता करने के लिए इस्तेमाल होता है। इन मशीनों का उपयोग करके पता कर सकते हैं कि किसी शख्स की नींद क्यों खराब हो रही है।  
कीमत: 2500 रुपये से शुरू

स्मार्ट तकिये और गद्दे: ये दोनों ही चीजें सही तरीके से सोने में मदद करती हैं। इनकी मदद से खर्राटों के साथ OSA में भी कुछ राहत मिल जाती है।  
कीमत: 1500 से 5000 रुपये

इन सवालों के जवाब ज़रूर पढ़ें
वाइन या दूसरा नशा करने से अच्छी नींद आती है?
कई लोग इस गलतफहमी में जीते हैं कि सोने से पहले अल्कोहल लेने से अच्छी नींद आती है। सचाई  इससे कोसों दूर है। असल में अल्कोहल नींद भगाने के लिए जिम्मेदार है। दूसरी परेशानी है कि लगातार अल्कोहल से लत लग जाती है।

स्लीपिंग गमीज लेने से नुकसान या फायदा?
स्लीपिंग गमीज में अक्सर मेलेटोनिन होता है। इसे भी डॉक्टर से पूछे बिना नहीं लेना चाहिए। इसका एडिक्शन हो सकता है।

बेड पर जाने के बाद भी करवटें ही बदले रहें तो क्या करें?
अगर नींद किसी स्ट्रेस की वजह से उड़ गई है और ऐसा अक्सर होता है तो पहले स्ट्रेस दूर करें। अगर ऐसा कभी-कभी हो तो उसके लिए उपाय किए जा सकते हैं। दरअसल, नींद भागने की वजह यह भी है कि हम उसके बारे में सोच-सोचकर परेशान होने लगते हैं। ऐसे में उस शख्स को किताबें पढ़ना, हल्की आवाज में संगीत सुनना जैसे काम करने चाहिए। अगर कमरे में कहीं से रोशनी आ रही हो तो उसे भी बंद कर देना चाहिए।

सपनों की वजह से नींद कब डिस्टर्ब होती है?
जब हम नींद में जाते हैं तो ब्रेन की ऐक्टिविटी कम होने लगती है। जब सबसे ज्यादा गहरी नींद में होते हैं तो भी ब्रेन की ऐक्टिविटी जीरो नहीं होती, लेकिन बहुत कम ऐक्टिव रहता है। कई बार हम सपनों में ही ऐक्ट करने लगते हैं, जैसे कुछ बोलना, हाथ-पैर चलाना, कुछ लोगों को स्लीप वॉकिंग यानी नींद में चलने की आदत होती है। अगर कोई शख्स इस तरह की ऐक्टिविटी कर रहा है तो मुमकिन है कि उसके नींद की क्वॉलिटी उतनी अच्छी न हो क्योंकि नींद में भी उसका ब्रेन काफी ऐक्टिव रह रहा है। इससे वह गहरी नींद में जा ही नहीं पा रहा। लेकिन अगर इस तरह की परेशानी या कोई रुकावट नहीं है तो नींद गहरी होगी। सीधे कहें कि नींद में देखे हुए जो सपने नींद खुलने के बाद याद न रहे, वह नींद बेहतर मानी जा सकती है। उठने के बाद फ्रेश महसूस होना चाहिए। ऐसा न लगे कि अभी और सोना है। 8 घंटे तक सोने के बाद भी नींद पूरी नहीं हुई है।

सोते समय संगीत सुनने क्या होता है?
अगर किसी को सोते समय हल्की आवाज में संगीत सुनने के दौरान नींद आती है तो यह बढ़िया है। यह एक तरह से लोरी की तरह होती है। यह नींद के लिए सही माहौल बनाती है। इस तरह के उपायों से मेलेटोनिन जल्दी निकलने की स्थिति बनती है। हम जल्द ही नींद की ओर बढ़ने लगते हैं, लेकिन तेज़ आवाज से बचना चाहिए। इससे नींद आएगी नहीं, भाग जाएगी।

अच्छी नींद से शुगर-बीपी काबू करने में भी मदद?
यह भी देखा गया है कि अगर किसी को शुगर, बीपी की परेशानी हो गई और उसे नींद की परेशानी रही है तो उसकी नींद ठीक होने पर (हर दिन 6 से 8 घंटे की नींद पूरी होने लगी, वह गहरी नींद लेने लगा) शुगर, बीपी की परेशानी भी काफी हद तक काबू में आ गई। दरअसल, ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि जब लगातार नींद पूरी नहीं होती है तो हमारे शरीर में इंटरनल इन्फ्लेमेशन रहने लगता है। इसकी वजह है कुछ मात्रा में साइटोकाइन (Cytokine) प्रोटीन का बनना।

खराब नींद मतलब इम्यूनिटी भी कमजोर?
दो-तीन दशक पहले तक नींद को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाता था। बल्कि यह माना जाता था कि 'जो सोया वो खोया, जो जागा सो पाया।' लोग यह मानते थे कि हमारी सेहत में, हमें सेहतमंद बनाने में नींद की कोई खास भूमिका नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे स्टडी हुई, नई रिसर्च सामने आई तो यह तय होता गया कि नींद की भूमिका शरीर की लगभग हर गतिविधि में होती है। अच्छी नींद का सकारात्मक असर हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं पर होता है। हमारा डाइजेशन बेहतर होता है। शरीर की इम्यूनिटी अच्छी रहती है। साथ ही हम कई दूसरी तरह की परेशानियों से भी बचते हैं।

इस साल ठान लें कि
★ हर रात कम से कम 6 से 8 घंटे की हेल्दी नींद लेंगे। सुबह उठेंगे तो फ्रेश महसूस करेंगे।
★ यह नींद 10 बजे रात तक शुरू कर देंगे और 6 बजे सुबह तक खत्म कर देंगे।
★ खुद सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल यानी स्क्रीन को सुला देंगे।
★ अगर ज्यादा फिजिकल ऐक्टिविटी नहीं भी कर पाए तो भी नींद को डिस्टर्ब नहीं करेंगे।
★ अगर डाइट में ज्यादा बदलाव नहीं भी कर पाए तो भी नींद में खलल पैदा होने नहीं देंगे।
★ नींद पूरी करके न्यूरो और दूसरे सिस्टम को हेल्दी रखेंगे।
★ हम यह समझते हैं कि एक अच्छी नींद का मतलब सेहतमंद शरीर है।

इन वजहों से नींद से बन जाती है दूरी
★ सूती या सॉफ्ट कपड़े पहनकर न सोना
★ टाइट अंडरगारमेंट्स पहनकर सोना
★ सोने वाले बिस्तर पर ज्यादा समय बिताना
★ बेड या तो बहुत सॉफ्ट होना या फिर बहुत हार्ड
★ स्क्रीन (मोबाइल, लैपटॉप आदि) से चिपके रहना
★ बेडरूम में दीवार घड़ी की मौजूदगी होना
★ ज्यादा मात्रा में कॉफी, चाय, कोल्ड ड्रिंक और अल्कोहल लेना, खासकर शाम को
★ कमरे में ताजा हवा की कमी होना
★ एक्सरसाइज या दौड़ने-भागने वाले खेल न खेलना
★ सुबह तक याद रहने वाले सपने आना

अच्छी नींद के लिए...
★ अच्छी और सेहतमंद नींद के लिए जरूरी है कि हम कुदरती प्रक्रिया को अपनाएं। बेड पर जाने पर दिमाग की ऐक्टिविटी जितनी जल्दी कम होगी, हम उतनी जल्दी सो जाएंगे। गहरी नींद का मतलब है 100 डेसिबल साउंड की आवाज़ होने पर भी नींद न खुले।
★ रात 9 से 11 बजे तक सो जाएं और सुबह 5 से 6 बजे तक उठ जाएं।
★ सोने से 2-3 घंटे पहले डिनर लें।
★ सोने से 30 मिनट से 1 घंटा पहले नो स्क्रीन (न मोबाइल देखना, न टीवी, न लैपटॉप) टाइम का पालन जरूर करना चाहिए।
★ शाम 6-7 बजे के बाद चाय या कॉफी न लें। इनमें मौजूद कैफीन नींद को दूर करने का काम करता है। इससे मेलेटोनिन बनने में दिक्कत होती है।
★ सोने के कमरे में कम रोशनी या अंधेरा रखें। इससे शरीर सही मात्रा में नींद के लिए ज़रूरी हार्मोन बना पाता है।
★ बेड, तकिया आदि को आराम के अनुसार चुनें। कितना मोटा पिल्लो होगा इसे आप ही तय करें।
★ तकिये की ऊंचाई न बहुत ज्यादा हो और न बहुत कम। आरामदायक स्थिति ही बनाए रखें।
★ किस दिशा में सोना है, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
★ पेट के बल सोने से बचना चाहिए। साइड में बेस्ट है, करवट लेकर लेफ्ट या राइट।
★ अगर किसी की नींद स्ट्रेस आदि की वजह से डिस्टर्ब हुई हो तो पहले स्ट्रेस को दूर करना जरूरी है। इसके लिए साइकॉलजिस्ट की मदद ली जा सकती है।

अच्छी नींद में ये भी हैं मददगार
1. एक्यूपंक्चर से भी नींद की समस्या का समाधान!
सुई चिकित्सा जिसे एक्यूपंक्चर कहते हैं। इसकी अपनी भूमिका है। कई तरह के इलाज में यह सफल है। गहरी नींद लाने के मामले में या स्लीपिंग पैटर्न को दुरुस्त करने में भी इसका अहम रोल है। अहम बात यह कि इसमें कोई दवा नहीं दी जाती, इसलिए इसका साइड इफेक्ट्स भी नहीं है और न ही इसका एडिक्शन ही होता है। एक्यूपंक्चर ने दिनचर्या को यांग (Yang) और यिन (Yin) में बांटा गया है। यांग जहां दिन के लिए है। वहीं यिन रात के लिए। एक्यूपंक्चर के अनुसार हर शख्स को अपनी ज्यादातर ऐक्टिविटी यांग में ही करनी चाहिए। यह समय होता है शरीर में बनने वाली एनर्जी को यूज करने का। वहीं यिन होता है शरीर को आराम करने के लिए। दिमाग को सुकून देने के लिए। अगर कोई शख्स रात में जगता है, देर रात खाना खाता है तो स्वाभाविक है कि उसके तमाम सिस्टम को हर वक्त ऐक्टिव रहना पड़ता है। इससे हमारे ज़रूरी अंग जैसे लिवर, किडनी आदि को ज्यादा काम करना पड़ता है। इससे उन पर दबाव पड़ता है।
★ एक्यूपंक्चर के अनुसार हमारे शरीर में कुछ अंगों में खास पॉइंट होते हैं जिन्हें ऐक्टिव करने से नींद की क्चॉलिटी अच्छी हो जाती है।
★ ऐसे पॉइंट सिर में, हाथ और पैरों में होते हैं।
★ अगर किसी शख्स का नींद सालभर से डिस्टर्ब है तो अमूमन 12 सिटिंग्स में काम हो जाता है।
★ हफ्ते में 3 दिन के हिसाब से 4 हफ्ते की सिटिंग होती है।
★ अगर समस्या इससे ज्यादा पुरानी है तो सिटिंग्स की संख्या बढ़ानी पड़ सकती है। वैसे आखिरी फैसला मरीज की स्थिति देखकर किया जाता है।

2. आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे नींद लाने के
आयुर्वेद में सेहतमंद शरीर के तीन स्तंभ बताए गए हैं- आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य। इसमें निद्रा एक अहम स्तंभ है और अहम बात यह कि ये तीनों आपस में जुड़े हुए हैं। एक-दूसरे पर आश्रित हैं। इसलिए अच्छी नींद लेनी ही चाहिए और इसके लिए जतन भी ज़रूर करने चाहिए।
सर्दियों में: अगर नहाना मुमकिन न हो तो गुनगुने पानी से चेहरे, पैरों आदि को धो लें। पैरों को 10 मिनट गुनगुने पानी में डुबाकर रखें। इससे पैरों की मांसपेशियों को आराम मिलता है। अच्छी नींद आती है।
गर्मियों में: गर्मियों और बरसात में रात को सोने से पहले सामान्य पानी से नहाना ही चाहिए। इससे ताजगी महसूस होती है। अगर नहाना मुमकिन न हो तो ताजे पानी से सिर, बाजू, पैरों आदि को धो लें।  

शवासन: अगर नींद की परेशानी हो तो शवासन बहुत फायदा पहुंचा सकता है। अपने शरीर को पैरों से ढीला करते हुए एक-एक अंग करके सिर तक पहुंचना है। पूरे शरीर की मांसपेशियां आराम की मुद्रा में पहुंच जाती हैं। शरीर का तनाव कम होने लगता है। शुरुआती दिनों में शवासन की मुद्रा में 15 मिनट तक रहना चाहिए। धीरे-धीरे 5 मिनट में बदल जाता है।

मेडिटेशन: हर रात सोने से पहले 5 से 10 मिनट का मेडिटेशन कर सकते हैं। यह मन को शांत करने में अहम भूमिका निभाता है। हमारे अधूरे काम जो बेड पर लेटने के बाद ख्यालों के हेवी डोज के रूप में आकर नींद को भगा देते हैं, मेडिटेशन यानी ध्यान उसी नींद को वापस लाने में अहम भूमिका निभाता है। नींद की समस्या न हो तो भी इससे फायदा है।

मालिश भी कारगर: हल्के हाथों से तलवों की तेल (सरसों, नारियल, तिल) से मालिश करें। वैसे बाजार में कई मेडिसिनल आयुर्वेदिक तेल भी मौजूद हैं। मसलन: महानारायण तेल, महामाष, विषगर्भ तेल, पिंड तेल आदि।
★ अगर घर में देसी घी हो तो उसे हल्का गर्म कर 5 से 10 मिनट तक तलवों की मसाज करने से फायदा होता है।
★ पोटली मसाज भी फायदेमंद है। आक और धतूरे के 2 से 3 पत्ते और निर्गुंडी के 3 से 4 पत्ते लेकर सूती के कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। इस पोटली को मेडिकेटिड तेल में डुबोकर शरीर पर मसाज करने से नींद जल्दी आती है।

घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं अच्छी नींद के लिए
★ गाय के दूध में एक चुटकी जायफल या खसखस मिलाकर लेने से नींद में फायदा होता है।
तेल वाली रुई से फायदा: सिर पर ब्राह्मी आंवला या नारियल तेल को रुई (पैर के तलवों के साइज) में डुबोकर सिर के ऊपरी हिस्से में स्कार्फ या मफलर की मदद से बांधकर रखने से मन रिलैक्स होता है।
सिर की मालिश: यह तन और मन के बीच ऊर्जा का संतुलन बनाता है। शरीर के तापमान पर काबू रखता है और शरीर में खून व दूसरे द्रवों के बहाव में सुधार करता है। इस तरह हर दिन मालिश करने से मानसिक शांति बनी रहती है। सिर की हल्की मसाज नहाने से पहले करने से न सिर्फ बाल सेहतमंद होते हैं, बल्कि यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी बहुत मददगार होती है। इससे तनाव दूर होता है और रात में गहरी नींद आती है। मालिश हल्के हाथों से करनी चाहिए।
★ अजवाइन की प्रकृति ही नींद लाने वाली है। अगर कोई शख्स पित्त प्रकृति का है तो वह 250 मिली ग्राम (आधा चुटकी), वात और कफ प्रकृति वाले 1 चुटकी अजवाइन पानी के साथ सोने से पहले निगल लें तो फायदा होता है।
★ खाने में गाय का घी एक चम्मच लेने से भी नींद में फायदा पहुंचता है। गाय के घी को चित्त शांत करने वाला बताया गया है।
★ नींद कम आने की शिकायत हो तो श्रीखंड (दही का बना होता है) या दही आधा कटोरी लेना चाहिए।

एक्सपर्ट पैनल
★ डॉ. दलजीत सिंह, VC एंड हेड न्यूरो सर्जरी, MAX स्मार्ट
★ डॉ. जी. सी. खिलनानी, चेयरमैन, डिपार्टमेंट ऑफ पल्मोनरी, PSRI
★ डॉ. विजय हड्डा, पल्मनरी क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, AIIMS
★ डॉ. रमन कपूर, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल एक्यूपंक्चर, सर गंगाराम हॉस्पिटल
★ डॉ. आर. पी. पाराशर, वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य
★ डॉ. नीतू जैन, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनलॉजी एंड क्रिटकल केयर, PSRI हॉस्पिटल

नवभारत टाईम्स से साभार 

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