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Showing posts from October, 2025

जल एवं पृथ्वी तत्व चिकित्सा (उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय)

जल एवं पृथ्वी तत्व चिकित्सा (उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय) इकाई 1  जल तत्व परिचय, जल चिकित्सा की अवधारणा, महत्व एवं सावधानियाँ 1.1 प्रस्तावना 1.2 उद्देश्य 1.3 जल तत्व परिचय 1.4 जल चिकित्सा की अवधारणा 1.5 जल चिकित्सा का महत्व 1.6 जल चिकित्सा की सावधानियाँ 1.7 सारांश 1.8 पारिभाषिक शब्दावली 1.9 अभ्यास प्रश्नों के उत्तर 1.10 संदर्भ ग्रन्थ सूची 1.11 निबन्धात्मक प्रश्न 1.1 प्रस्तावना प्रिय साथियों, इस समस्त प्रकृति का निर्माण आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी नामक पांच तत्वों से होता है। आकाश तत्व इन पंचतत्वों में सबसे सूक्ष्म तत्व है। तत्वों में आकाश तत्व की स्थूलता के क्रम में बढते हुए क्रमश आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल एवं जल से पृथ्वी तत्व का वर्णन होता है। यह पंचतत्व एक समयोग में संयुक्त होकर संसार और मानव शरीर की रचना भी उपरोक्त पँच तत्व ही करते हैं। मानव शरीर की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं- क्षितिज पावक जल गगन समीरा,  पंचतत्व रचित अधम शरीरा। इस प्रकार मानव शरीर उपरोक्त पँच तत्वों के समयोग का परिणाम है। ईश्वर के वाचक शब्द भगवान के अक्षरों ...

लहसुन – प्याज

लहसुन – प्याज  खास बातें ★ लहसुन की मात्रा गर्मियों में रोजाना कम (1 से 2 कली) ही होनी चाहिए और सर्दियों में ज्यादा (2 से 3 कली)। ★ जिन लोगों को पाचन की समस्या हो या इसे खाने से गैस की परेशानी हो, वे डॉक्टर की सलाह से ही लहसुन खाए। ★ लहसुन को बारीक काटकर या क्रश करके 10 मिनट छोड़ने के बाद ही यह पूरा फायदा देता है। ★ पुराने लहसुन की तुलना में ताजा लहसुन को खाना ज्यादा फायदेमंद है। लहसुन एक अच्छा प्रोबायटिक है। ★ लहसुन की छोटी (देसी लहसुन) कली में एलिसिन (फायदेमंद कंपाउंड) की मात्रा कुछ ज्यादा होती है। ★ प्याज में पत्ते वाली प्याज ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे फाइबर और ऐटिऑक्सिडेट ज्यादा मिलता है। लहसुन कई लोगों की सब्जी में अगर लहसुन-प्याज की मौजूदगी न हो तो उन्हें स्वाद ही नहीं मिलता। वहीं लहसुन-प्याज खाना दिल, दिमाग, इम्यूनिटी आदि के लिहाज से भी अच्छा माना जाता है। ऐसे में एक सवाल जरूर उठता है कि जो लोग लहसुन-प्याज नहीं खाते, क्या वे अपनी सेहत से समझौता करते हैं? इन दोनों सब्जियों को आयुर्वेद में तामसिक भोजन क्यों कहा जाता है? आज सुन ही लेते हैं लहसुन-प्याज की असल धुन।...

यूरिक_एसिड

🔬 #यूरिक_एसिड की आधुनिक जाँच – आधुनिक विज्ञान,  आयुर्वेदिक और पंचतत्व दृष्टिकोण से सम्पूर्ण विश्लेषण 🔹यूरिक एसिड (#Uric_Acid) शरीर में पुरिन (#Purine) नामक यौगिक के टूटने से बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है। यह सामान्यतः गुर्दों (±Kidneys) के माध्यम से मूत्र के द्वारा बाहर निकल जाता है। जब इसकी मात्रा रक्त में अधिक बढ़ जाती है, तो यह शरीर के जोड़ों, ऊतकों और अंगों में क्रिस्टल के रूप में जमने लगता है, जिससे कई रोग उत्पन्न होते हैं। 🧪 आधुनिक दृष्टिकोण (Allopathy View) परीक्षण      सामान्य मान (Normal Range)  उच्च स्तर पर संभावित रोग    निम्न स्तर पर प्रभाव पुरुषों में    3.4 – 7.0 mg/dl        गाउट (Gout), किडनी स्टोन, आर्थराइटिस, यूरिक नेफ्रोपैथी, कार्डियोवेस्कुलर डिज़ीज़            निम्न स्तर पर प्रभाव- यकृत विकार, गुर्दों की अधिक फिल्ट्रेशन महिलाओं में   2.4 – 6.0 mg/dL   हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम, गर्भावस्था में टॉक्सेमिया   निम्न स्तर पर प्र...