जल एवं पृथ्वी तत्व चिकित्सा (उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय)
जल एवं पृथ्वी तत्व चिकित्सा (उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय) इकाई 1 जल तत्व परिचय, जल चिकित्सा की अवधारणा, महत्व एवं सावधानियाँ 1.1 प्रस्तावना 1.2 उद्देश्य 1.3 जल तत्व परिचय 1.4 जल चिकित्सा की अवधारणा 1.5 जल चिकित्सा का महत्व 1.6 जल चिकित्सा की सावधानियाँ 1.7 सारांश 1.8 पारिभाषिक शब्दावली 1.9 अभ्यास प्रश्नों के उत्तर 1.10 संदर्भ ग्रन्थ सूची 1.11 निबन्धात्मक प्रश्न 1.1 प्रस्तावना प्रिय साथियों, इस समस्त प्रकृति का निर्माण आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी नामक पांच तत्वों से होता है। आकाश तत्व इन पंचतत्वों में सबसे सूक्ष्म तत्व है। तत्वों में आकाश तत्व की स्थूलता के क्रम में बढते हुए क्रमश आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल एवं जल से पृथ्वी तत्व का वर्णन होता है। यह पंचतत्व एक समयोग में संयुक्त होकर संसार और मानव शरीर की रचना भी उपरोक्त पँच तत्व ही करते हैं। मानव शरीर की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं- क्षितिज पावक जल गगन समीरा, पंचतत्व रचित अधम शरीरा। इस प्रकार मानव शरीर उपरोक्त पँच तत्वों के समयोग का परिणाम है। ईश्वर के वाचक शब्द भगवान के अक्षरों ...