लहसुन – प्याज
लहसुन – प्याज
खास बातें
★ लहसुन की मात्रा गर्मियों में रोजाना कम (1 से 2 कली) ही होनी चाहिए और सर्दियों में ज्यादा (2 से 3 कली)।
★ जिन लोगों को पाचन की समस्या हो या इसे खाने से गैस की परेशानी हो, वे डॉक्टर की सलाह से ही लहसुन खाए।
★ लहसुन को बारीक काटकर या क्रश करके 10 मिनट छोड़ने के बाद ही यह पूरा फायदा देता है।
★ पुराने लहसुन की तुलना में ताजा लहसुन को खाना ज्यादा फायदेमंद है। लहसुन एक अच्छा प्रोबायटिक है।
★ लहसुन की छोटी (देसी लहसुन) कली में एलिसिन (फायदेमंद कंपाउंड) की मात्रा कुछ ज्यादा होती है।
★ प्याज में पत्ते वाली प्याज ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे फाइबर और ऐटिऑक्सिडेट ज्यादा मिलता है।
लहसुन
कई लोगों की सब्जी में अगर लहसुन-प्याज की मौजूदगी न हो तो उन्हें स्वाद ही नहीं मिलता। वहीं लहसुन-प्याज खाना दिल, दिमाग, इम्यूनिटी आदि के लिहाज से भी अच्छा माना जाता है। ऐसे में एक सवाल जरूर उठता है कि जो लोग लहसुन-प्याज नहीं खाते, क्या वे अपनी सेहत से समझौता करते हैं? इन दोनों सब्जियों को आयुर्वेद में तामसिक भोजन क्यों कहा जाता है? आज सुन ही लेते हैं लहसुन-प्याज की असल धुन।
कोई भी शख्स एक बार में 100 ग्राम लहसुन नहीं खाता। खा ले तो पचा नहीं पाएगा। आमतौर पर एक शख्स कम से कम 1 कली (जिसका वजन 2 से 3 ग्राम हो) कच्चा या ज्यादा से ज्यादा 1 पूरा लहसुन (जिसका वजन 20 से 30 ग्राम तक हो) पकाकर खाता है। लेकिन कोई भी पूरा लहसुन कच्चा नहीं खा सकता। लहसुन को पकाकर खाना मुमकिन है। वहीं, पूरा लहसुन कच्चा खाने से पेट में जलन, लूज मोशन तक मुमकिन है। इसमे मौजूद कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट आदि की मात्रा की ज्यादा अहमियत नहीं है। अहमियत है एलिसिन (लहसुन में मौजूद सबसे उपयोगी कंपाउंड) और कुछ विटामिनों की।
फायदे हैं बहुत
गुणकारी लहसुन
★ यह बीपी को काबू करने में मदद करता है।
★ यह गुड कलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है और खराब कलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है।
★ यह खून को पतला करने में मददगार है। इससे हार्ट अटैक का रिस्क कम हो जाता है।
★ एलिसिन ऐंटि-बैक्टीरियल, ऐंटि-वायरल और ऐंटि-फंगल होता है।
★ सर्दी, जुकाम आदि को कम करने में मददगार है।
★ यह डाइजेशन को सुधारता है।
★ यह भूख जगाता है और डाइजेस्टिव जूस को निकालने में मददगार है।
★ यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी परेशानियों को कम करने में कारगर है।
★ लहसुन इंसुलिन की सेसिटिविटी को बढ़ाकर शुगर को काबू करने का काम भी करता है।
★ इसमें ऐंटि-ऑक्सिडेंट गुण है। इससे चेहरे पर झुर्रियां कम होती हैं।
★ यह लिवर को साफ कर शरीर को डिटॉक्स (हानिकारक तत्व हटाने) करने में मददगार है।
★ कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की क्षमता रखता है।
कितनी मात्रा में खाएं
इसे दो तरीकों से खा सकते हैं। पहला सब्जी आदि में मसाले के रूप में और दूसरा औषधि के रूप में। अगर सब्जी में मसाले के रूप में खाते है तो की मात्रा कम हो जाती है।
हिस्से कम ही लहसुन आता है। वही औषधि के रूप में खाने से पहले किसी वैद्य की राय लेना सही होगा। फिर भी अगर खाना हो तो इसकी मात्रा तय होनी चाहिए।
सुबह खाली पेट । से 2 कच्ची कली, 10 मिनट पहले क्रश किया हुम्ला खा सकते है। उबालकर खाने से एलिसिन की की मात्रा कम हो जाती है।
वहीं अगर तेल में डीप फ्राइ करते हैं तो एलिसिन की मात्रा काफी कम हो जाती है। लहसुन को भोजन करने से 30 मिनट पहले भी ले सकते हैं।
कैसे हो ज्यादा फायदा
कच्चा बारीक कटा हुआ लहसुन सबसे ज्यादा फायदेमंद है। अगर कोई लहसुन की कली को साबुत निगल लेता है तो उसका पूरा फायदा नहीं मिलेगा। इसलिए सही तरीका अपनाना जरूरी है।
लहसुन की 1-2 कली को बारीक काटकर या क्रश करके 10 मिनट के लिए छोड़ दें ताकि लहसुन में मौजूद एलिसिन ऐक्टिव हो जाए। दरअसल, लहसुन में एलिन (Alliin) नाम का एक कंपाउंड और एलिनेज नाम का एक एंजाइम होता है। जब जब हम हम लहसुन को काटते या क्रश करते हैं तो ये दोने आपस में मिल जाते हैं और इनसे एक नया कंपाउंड बनता है 'एलिसिन' जिसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं। एतिसिन बनने में 10 मिनट का उक्त लगता है। इसी एलिप्ति की वजह से लहसुन पे औषधीय गुण भी आता है। काटकर या क्रश करके।
शरीर को करता है डिटॉक्स
लहसुन को मॉडर्न मेडिसिन में काफी उपयोगी माना गया है। आयुर्वेद भी इसे उपयोगी मानता है, लेकिन कुछ सीमाओ के साथ। इसमें मौजूद एलिसिन (Allicin) एक पावरफुल ऐटि-बायोटिक और ऐटि-फंगल एजेंट है। एलिसिन में मौजूद सल्फर शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। यही वजह है कि भारत में सदियों से लोग इसे मसाले और सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं।
100 ग्राम लहसुन में मिलते हैं ये-ये
कार्बोहाइड्रेट: 33gm,
प्रोटीन: 6.4gm,
फैट: 0.5 ग्राम हा,
मिनरल्सः पोटेशियम, मैग्नीशियम, जिंक, फास्फोरस, कैल्सियम और आयरन
विटामिनः विटामिन-C, विटामिन B1, विटामिन B6, विटामिन B2, विटामिन K और विटामिन A
एलिसिनः यही कंपाउंड लहसुन की खास बनाता है। यह लहसुन के औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार है।
लहसुन खाने से मुंह से आए गंध तो क्या करें
लहसुन में कई गुण है तो इसे खाने के बाद मुंह से आने वाली इसकी स्मेल की वहज से लोग इसे नापसन है। इसकी स्मेल को अलग तो नहीं कर सकते, लेकिन लहसुन खाने के बाद अगर पुदीने की चाय पिए इसकी पत्तिया चबा ले, अगर ये भी उपलब्ध न हों तो नींबू पानी पीकर या इलायची, सौफ खा लेने वाली स्मेल में कमी आएगी। अगर ये सब भी न हो ने माउथवॉश से कुल्ला करें। ब्रश करें।
किन लोगों को नहीं खाना चाहिए
आयुर्वेद किसी भी बीमारी के लिए वात, पित्त और कफ के असंतुलन को अहम लोग उच्च्च पित्त प्रकृति वाले होते हैं, उन्हें लहसुन कम या बहुत कम खाना चाहिए। हर हफ्ते में 2 दिन सुबह 1 कली खाना काफी रहेगा। उच्च पित्त प्रकृति वाले लोगों को से पेट में जलन, अपच और गर्मी बढ़ सकती है।
जो लोग लहसुन नहीं खाते, उनके लिए अच्छे किस्म
जोड़ी मानते हैं। अहम बात यह कि लहसुन और प्याज की सब्जिया है। इनका जीनस (पजाति) ilum है, व
आयुर्वेद में तामसिक जाता है लहसुन
आयुर्वेद में भोजन को गणों के आधार पर 3 प्रकार का माना आयुर्वेद मानता है कि राजन करने के बाद जब उसका पाचन का बर्ताव भी वैसा हो जाता है। लहसुन-प्याज उतेजना बढ़ाते
नाः इससे मन गया है। ध्यान,
प्याज, सदर महत्वाकांक्षा बदली है। इसस इन राजसिक भोजन कहा
लहसुन की स्वादिष
सूखी
हिस्से कम ही लहसुन आता है। वही औषधि के रूप में खाने से पहले किसी वैद्य की राय लेना सही होगा। फिर भी अगर खाना हो तो इसकी मात्रा तय होनी चाहिए।
सुबह खाली पेट 1 से 2 कच्ची कली, 10 मिनट पहले क्रश किया हुआ खा सकते है। उबालकर खाने से एलिसिन की मात्रा कम हो जाती है।
वहीं अगर तेल में डीप फ्राइ करते हैं तो एलिसिन की मात्रा काफी कम हो जाती है। लहसुन को भोजन करने से 30 मिनट पहले भी ले सकते हैं।
कैसे हो ज्यादा फायदा
कच्चा बारीक कटा हुआ लहसुन सबसे ज्यादा फायदेमंद है। अगर कोई लहसुन की कली को साबुत निगल लेता है तो उसका पूरा फायदा नहीं मिलेगा। इसलिए सही तरीका अपनाना जरूरी है।
लहसुन की 1-2 कली को बारीक काटकर या क्रश करके 10 मिनट के लिए छोड़ दें ताकि लहसुन में मौजूद एलिसिन ऐक्टिव हो जाए। दरअसल, लहसुन में एलिन (Alliin) नाम का एक कंपाउंड और एलिनेज नाम का एक एंजाइम होता है। जब जब हम हम लहसुन को काटते या क्रश करते हैं तो ये दोने आपस में मिल जाते हैं और इनसे एक नया कंपाउंड बनता है 'एलिसिन' जिसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं। एतिसिन बनने में 10 मिनट का उक्त लगता है। इसी एलिप्ति की वजह से लहसुन पे औषधीय गुण भी आता है। काटकर
प्याज से प्यार ?
आज भी ऐसा माना जाता है कि गर्मियों में धूप में बाहर जाना हो तो प्याज खाकर जाना चाहिए क्योंकि इसे खाने के बाद तू लगने का खतरा कम हो जाता है। दरअसल, ठंही तासीर की वजह से प्याज के बारे में ऐसा कहीं जाता है। इसमें ऐसे कई विटामिन, मिनरल आदि मिलते हैं जो डायबीटीज और बीपी को कंट्रोल करने में, ऐटिबायोटिक के तौर पर, चालों को झड़ने से बचाने में और कलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। अगर पत्ते वाला प्याज मिल जाए, तो उसे सलाद के रूप में भी खा सकते हैं।
100 ग्राम प्याज में विटामिन और मिनरल्स की मात्रा
विटामिन-C 10mg
विटामिन B6 0.1mg
फोलेट 15mcg
पोटैशियम 100mg
सोडियम 2mg.
मैग्नीशियम 8mg
कैल्सियम 9mg
आयरन 0.4mg
फास्फोरस 15mg
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लहसुन और प्याज की जोड़ी
प्याज की तासीर ठंडी होती है। अहम बात यह कि जब भी कोई प्याज के लिए भी ख्याल आ ही जाता है। सब्जियों में जहा प्याज तेमाल भी खूब होता है। इसलिए कुछ लोग इसे पति-पत्नी की लहसुन और प्याज, दोनों ही Alliaceae family (बायॉलजी में) ति)
illum है, लेकिन इनकी जाति अलग-अलग है। प्याज का वैज्ञानिक न
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मसिक भोजन क्यों माना हसुन और प्याज को ?
3 प्रकार का माना गया हैः सात्विक, राजसिक और तामसिक। जब उसका पाचन होता है और शरीर उसे जज्ब करता है तो इंसान न उत्तेजना बढ़ाते है शरीर में गर्मी पैह करते हैं।
ये बनाते हैं प्याज को और भी खास
प्याज में कई तरह के जरूरी कंपाउंड मिलते हैं। इनमें फ्लेवोनोइड और क्वेरसेटिन अहम है। ये अच्छे ऐंटिऑक्सिडेट है। इसलिए शरीर के लिए बेहद उपयोगी है। इनके अलावा प्याज में फाइटोकेमिकल्स भी पाए जाते हैं। ये इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं। प्याज में मौजूद क्वेरसेटिन पावरफुल ऐंटिऑक्सिडेंट (यह शरीर में बनने वाले हानिकारक फ्री रेडिकल्स को कम करने में अहम भूमिका निभाता) है। हरा प्याज और प्याज के पत्ते ज्यादा फायदेमंद होते हैं।
कैसे खाएं प्याज
उपयोग का तरीका मौसम
गर्मी
कच्चा सलाद या चटनी में डालकर, पकाकर खाएं
फायदे
शरीर को ठंडक, सब्जी में डालने से लू से बचाव
सर्दी
सब्जी, पराठा, सूप में ज्यादा मात्रा में खाना
इम्यूनिटी मजबूत, स्वाद बढ़िया
दोनों मौसम में
प्याज के पते के पकौड़े बेसन आदि के साथ हरे-भरे पकौड़े
स्वादिष्ट के
हुई) नमकः आधा यामच (स्वादानुसार) सरसों तेलः । कमच
गर्म उसमे मिर्च कर कुछ 8212
ऐसे बनाएं सभी चीजे मिक्सी या दिल-बड़े पर दरदरी पफैस से फिर - सरसों का तेल डोले और मिक्स करे। पराठा य दाल-चावल के साथ खाएं।
नोटः अगर चटनी लवे समय तक स्टोर करना चाहते हैं तो उसमें चोड़ा ज्यादा तेल और हल्का तेज नमक डाले और फ्रिज में रखें। कच्चा लहसुन ज्यादा सीज लगता है, चाहे तो कलिपी को हल्का भून भी सकते हैं।
त्म की नजर से
पौगिक) होते हैं जो मन और सेस ऑर्गन को उत्तेजित और अशांत करते है।
योग और ध्यान में इसकी गंध को मानसिक एकाग्रता में बाधक माना जाता है।
कुछ धार्मिक परंपराओं में पूजा-पाठ आदि में लहसुन और प्याज को इसी प्रकृति को पजह से नहीं खाया जाता है।
नोटः आयुर्वेद इसके औषधीय गुणों की बात भी करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और कफ का नाशक है। यह इम्यूनिटी मजबूत करने वाला और नेशन में सुधार करने वाला है।
क्यों निकलते हैं प्याज काटते वक्त आंसू
भाप युनान और तीर्थ है।
सपनो में लेकिमेटरी मैटर नामक केमिकल होता है जो आंखों की
नसों को उत्तेजित करता है और आसू पैदा करता है। लेकिमेटरी फैक्टर एक सरकर युक्त यौगिक है
जो एलिनेसिस एंजाइम की मदद से बनता है। यह एंजाइम प्याज के टिशू में मौजूद अमीनो एसिड इड को लेड़ता है और सापेनिक एसिड
बनाता है। यह उंड तीखी गंध की पंजह बनता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पीले प्याज में सल्फर का स्तर ज्यादा लेता है जिससे वे कटने या हिलने पर
परपादा आंसु लाते है। वहीं पुराने या खराब प्याज में भी सल्फर यौगिकों का लेवल ज्यादा होता है, इसलिए जब ऐसे प्याण को काटा जाता है तो वे भी ज्यादा तोरेखी गंध देते हैं।
प्याज की वजह से आंसू निकलने से नुकसान भी?
प्याज काटते समय आंसू निकलने से आखों पर अमूमन कोई बुरा असर नहीं पड़ता। हां, आंखों ने जलन महसूस हो सकती है। आसू निकलने के बाद आंखो की जलन कम होती चली जाती है। जलन से भो बचना है तो नीचे बताए हुए उपाय कर सकते हैं:
....तो नहीं निकलेगे आंसू
प्याज को फ्रिज था फ्रीजर में रखी सरेके लिए प्याज को फ्रिज में नही रखना है। जब प्याज काटना हो तो उससे 10-15 मिनट पहले उसे फ्रिज में रख दे या फिर 5-7 मिनट के लिए फ्रीजर में स्खे। इससे प्याज में मौजूद एंजाइम को सक्रियता
कम हो जाती है और प्याज से ज्यादा आसू नही निकलते।
प्याज पर विनेगर लगा के प्याज काटने से 5 "से 10 मिनट पहले इसे किरेगर में डालकर छोड दे और फिर काटे। इससे ध्यान से निकलने वाले
पानी में भिगों के प्यान को काटने में 5 से 10 मिनट पहले पानी में रख दे तो आसू निकलेंगे। अगर यह पानी तांडा हो भी कम आएगे।
याकू पर नीबू का रस लगा के मे जाता है। इससे आंसू कम निहाल है।
गॉगल्स पहन ले आओ को पूरी कर करने वाले गएका पहन सकते हैं। इससे आयु कम निकलेगे।
लहसुन और प्याज की जोड़ी
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ऐटिऑक्सिडेंट (यह फ्री रेडिकल्स को कम निभाता) है। हरा प्याज फायदेमंद होते हैं।
कैसे
लहसुन की तासीर गर्म होती है और प्याज की तासीर ठंडी होती है। अहम बात यह कि जब भी कोई लहसुन की बात करता है तो मन में प्याज के लिए भी ख्याल आ ही जाता है। सब्जियों में जहा प्याज डोला जाता है, वहा लहसुन का इस्तेमाल भी खूब गोता है। इसलिए कुछ लोग इसे पति-पत्नी की जोड़ी मानते हैं। अहम बात यह कि लहसुन और प्याज, दोनों ही Alliaceae family (बायर्यालजी में) की सब्जिया है। इनका जीनस (प्रजाति) Allium है, लेकिन इनकी जाति अलग- अलग है।
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प्याज का वैज्ञानि
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आयुर्वेद में तामसिक भोजन क्यों माना जाता है लहसुन और प्याज को?
आयुर्वेद में भोजन को गुणों के आधार पर 3 प्रकार का माना गया हैः सात्विक, राजसिक और तामसिक । आयुर्वेद मानता है कि भोजन करने के बाद जब उसका पाचन होता है और शरीर उन्हें जज्ब करता है तो इसान का बर्ताव भी वैसा हो जाता है। लहसुन-प्याज उत्तेजना बढ़ाते हैं, शरीर में गमी पैद्र करते हैं।
सब्जिया
आता इससे मन ता है। इसलिए इन्हें
गया है। ध्यान, वे में मददगार है।
लहसुन, प्याज शराब, ज्यादा
राजसिक भोजनः चाय, कॉफी, प्याज, मसालेदार खाना आदि। इनसे ऐक्टिविटी, उत्तेजना और
महत्वाकांक्षा बढ़ती है। इसलिए, इन्हें राजसिक भोजन कहा गया है।
लहसुन की खादिष्ट चटनियां
सूखी लाल मिर्च वाली लहसुन की चटनी
सामग्री:
लहसुन की कलिया: 15-20 सूखी लाल मिर्च 6-8 (मिगत हुई)
जीरा: 1 चम्मच
नमकः आधा चम्मच
(स्वादानुसार)
नीबू का रसः । चम्मच या बोहा-सा इमली का गुदा परस्ते खेलः 1 चम्मच (प्रवद के लिए)
अल बनाएं लाल मिर्च को 10-15 मिनट के लिए भिगोकर रख दे। सभी मामी को मिक्सी तेल गर्म कर और और
माटर-लहसुन की चटनी
सामग्री:
(दक्षिण भारतीय शैली)
नौसम
गर्मी
उपयोन
चटनी पकाक
सर्दी
सब्जी
पकौ
दोनों मौसम में
पकौ
क्यों नि
काटते
व्याज काटने का आखें सल्फयुक्त रसायन ओ निकलने की स्थिति अम प्याजको काटे या फिर ही। दरअसल, इन सराफ्नो में लैक्रिमेटरी फैक्टर नामक केमिक होता है जो आखों की नसों को उत्तेजित करन है और आंसू पैदा कर है। लैक्रिमेटरी फैक्टर सल्फर युक्त यौगिक
जो एलिनेसिस एंजाइ
की मदद से बनता है
यह एंजाइम प्याज के
सत्फोक्साइड को तोड
बनाता है। यही कंपाउ
ध्यान देने वाली कत
कर स्तर ज्यादा होता
ज्यादा आसू लाते है भी सल्फर यौगिकों जब ऐसे प्याज को तीखी गंध देते हैं।
प्याज
निकल
या कारते सम
तामसिक भोजनः नॉनवेज,
मसालेदार खानाः ये आलस्य, सेक्स की इच्छा और क्रोध आदि को बढ़ाते हैं।
लहसुन-मूंगफली की चटनी
सामग्री:
लहसुन: 8-10 कलिया टमाटरः 2 मीडियम साइज के लाल मिर्च: 2 सुखी या हरी मिर्च राई: आधा चम्मच
करी पत्ता: 5-7 पत्ते
सरसों तेलः । चम्मच
नमकः आधा चम्म
(स्वादानुसार) ऐसे बनाएं सांसों तेल गर्म करे, राई और करी पत्ता उसमे डाले। इसे 1 से 2 मिनट प्रवाह करें। फिर लहसुन, मिर्च ठंडा होने के लिए पेट लहा होने पर सभी को निकासी
लहसुना 10-12 बलिया हरी मिर्च 2-3
भूगपत्नीः चम्मच (भुनी हुई
ऐ अनागी सभी जेजे मिक्सी मा कालीन और सि के
... तो न
प्याज को ि लिए प्याज क काटना हो तो फ्रिज में रख फिर 5-7 मिन के लिए प्रदेशम रयो। इससे प्य में मौजूद पंजा को सक्रियता
अगर चटनी लबे समय स घोड़ा ज्यादा जेल और हल्का तेज बल-और
ऐसे बनाएं: लाल मिर्च को 10-15 मिनट के लिए भिगोकर रख दे। सभी सामग्री को मिक्सी मे दरदरा पीस ले। तड़के के लिए थोडा सरसो तेल गर्म कर ले और चटनी में डाल दें। यह तीखी और चटपटी चटनी दाल-चावल या रोटी के साथ खा सकते है।
डालें। इसे 1 से 2 मिनट तक फ्राइ करें। फिर लहसुन, मिर्च और कटे टमाटर डालकर कुछ तेर तक भूना भूनने के बाद इन्हें ठंडा होने के लिए छोड़ दे। ठंडा होने पर सभी को मिक्सी में पीस ले। डोसा, इडली या रोटी के साथ खाए।
साथ खाएं।
नोटः अगर चटनी लवे समय तक स्टोर करना चाहते है तो उसमें थोड़ा ज्यादा तेल और हल्का तेज नमक डाले और फ्रिज में रखें। चटनी में कच्चा लहसुन ज्यादा तीखा लगता है, चाहे तो कलियो * को हल्का भून भी सकते हैं।
आयुर्वेद और अध्यात्म की नज़र से
फौरन उत्तेजना बढ़ाता है प्याज-लहसुन।
शरीर में गर्मी पैदा होती है। दरअसल, लहसुन की प्रकृति गर्म होती है।
लहसुन खाने से शरीर और मन में रजोगुण व तमोगुण बढ़ सकता है, जिससे क्रोध, उत्तेजना, वासना या बेचैनी बढ़ती है।
चूंकि यह वासना बढ़ाता है, इसलिए ब्रह्मचर्य जीवन अपनाने वाले इसे खाने से बचते हैं।
लहसुन की गंध तीव्र होती है, इसे निगेटिव एनर्जी को आकर्षित करने वाला माना गया है।
प्याज में भी तेज गंध और रसायन (जैसे सल्फर
यौगिक) होते है जो मन और सेस ऑर्गन को उत्तेजित और अशांत करते है।
योग और ध्यान में इसकी गंध को मानसिक एकाग्रता में बाधक माना जाता है।
कुछ धार्मिक परंपराओं में पूजा-पाठ आदि में लहसुन और प्याज को इसी प्रकृति की वजह से नहीं खाया जाता है।
नोटः आयुर्वेद इसके औषधीय गुणों की बात भी करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और कफ का नाशक है। यह इम्यूनिटी मजबूत करने वाला और डाइजेशन में सुधार करने वाला है।
इसलिए एक शख्स के हिस्से कम ही लहसुन आता है। वही औषधि के रूप में खाने से पहले किसी वैध की राय लेना सही होगा। फिर भी अगर खाना हो तो इसकी मात्रा तय होनी चाहिए।
तुक्त खाली पेट से कच्ची कली, 10 मिनट पहले कश किया हुमा खा सकते है। उबालकर खाने से एलिसिन को मात्रा कम हो जाती है।
वहीं अगर तेल में डीप फ्राइ करते हैं तो एलिसिन की मात्रा काफी कम हो जाती है। लहसुन को भोजन करने से 30 मिनट पहले भी ले सकते हैं।
कैसे हो ज्यादा फायदा
कच्चा चारीक कटा हुआ लहसुन सबसे ज्यादा फायदेमंद है। अगर कोई लहसुन की कली को साबुत निगल लेता है तो उसका पूरा फायदा नहीं मिलेगा। इसलिए, सही तरीका अपनाना जरूरी है।
लहसुन की 1-2 कली को बारीक काटकर
या क्रश करके 10 मिनट के लिए छोड़ दे। नाकि लहसुन में मौजूद एलिसिन ऐक्टिव हो जाए। दरअसल, लहसुन में पलिन (Alllin) नाम का एक कंपाउंड और एलिने नाम का एक एजाइम होता है। जब हम लहसुन को काढ़ते वा क्रश करते हैं तो ये दोनों आपस में मिल जाते हैं और इनसे एक नया कंपाउंड बनता है 'एबिसिन' जिसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके है। एर्तिमन बनने में 10 मिनट का वक्त लगता है। इसी एलिसिन की वजह से लहसुन में औषधीय गुण भी आता है। काटकर या क्रश करके फौरन ही खा लेगे या पका लेंगे तो एलिसिन बनने का वक्त ही नहीं मिलेगा या थोड़ी पात्रा में ही बनेगा।
ऐसे पहचानें लहसुन की अहम किस्में
लहसन की किमय में
शरीर को करता है डिटॉक्स
लहसुन को मॉडर्न मेडिसिन में काफी उपयोगी माना गया है। आयुर्वेद भी इसे उपयोगी मानता है, लेकिन कुछ सीमाओ के साथ। इसमें नौजूद एलिसिन (Allicin) एक पावरफुल पटि-बायर्यादिक और ऐंटि-कमल रजेंट है। एलिसिन में मौजूद फर शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कहता है। यही वजह है कि भारत में सदियों से लोग इसे मसाले और सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं।
100 ग्राम लहसुन में मिलते हैं ये-ये
कार्बोहाइड्रेट
प्रोटीन: 6.4
फेट: 0.5 ग्राम मिनरल्सः फास्फो पोटेशियम, मैग्नशियम, जिंक,
कैल्सियम और यरन
विटामिनः श्रटामिन-C, विटामिन B6. विद्यामिन B1,
विटामिन 82, विटामिन और विटामिन A
एलिसिनः यही कंपाउंड लहसुन की खास बनाता है। ए लहसुन के औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार है।
लहसुन खाने से मुंह से आए गंध तो क्या करें
लहसुन में कई गुण है तो इसे खाने के बाद मुंह से आने वाली इरको स्मेल की वहज से लोग इसे नामस है। इसकी स्मेल को अलग ती नहीं कर सकते, लेकिन लहसुन दाने के बाद अगर पुदीने की चाथ दिए इसकी पत्तियां चवा लें, अगर ये भी उपलब्ध न तो नावाने पोका या इलायची, सौफ ख वाली स्मेल में कमी आएगी। अगर ये सब भी न हो ने माउथवॉश से कुल्ला करें। ब्रश करने
किन लोगों को नहीं खाना चाहि
आयुर्वेद किसी भी बीमारी के लिए वात, पित्त और कफ के असंतुलन को अहम लोग उच्च पित्त प्रकृति वाले होते है, उन्हें लहसुन कम या बहुत कम खाना चाहिएर हफ्ते में 2 दिन सुबह 1 कली खाना काफी रहेगा। उच्च पित्त प्रकृति वाले लोगों को से पेट में जलन, अपच और गर्मी बढ़ सकती है।
जो लोग लहसुन नहीं खाते, उनके लिए अच्छे निकट
विकल्प
अदरक
हींग
फायदा
सूजन घटाता है, ऐटिऑक्सिडेट, आतो को फायदा, इम्यूनिटी बूस्टर शब
डाइजेशन में फायदा, एजाइम को ऐक्टिव करता है
प्याज
हल्दी
लहसुन जैसे गुण, हार्ट और बीपी में फायदेमंद
करण्यूमिन की मौजूदगी, सूजन कम करने वाला, दर्द में राहत
औराजकीर है। का केही है। T
Allan satiram
Allium cepe
आयुर्वेद में तामसिक भोजन क्यों जाता है लहसुन और प्याज क
आयुर्वेद में भोजन कामगारा आयुर्वेद मानत है किचन करने का होता है और है। सुनते हैं, शरीर में गर्मी पै
या है। ध्यान
लहसुन की स्पादिष्ट चटनि
सूखी लाल मिर्च वाली लहसुन की चटणी
घटनी
समग्रीः
लहसुन और प्याज की जोड़ी
लहसुन की तासीर गर्म होती है और प्याज की तासीर ठंडी होती है। अहम बात यह कि जब भी कोई लहसुन की बात करता है तो मन में प्याज के लिए भी ख्याल आ ही जाता है। सब्जियों में जहा प्याज डाला जाता है, दहा लहसुन का इस्तमाल है। इसलिए कुछ लोग इसे पति-पत्नी की जोड़ी मानते है। अहम बात यह कि लहसुन और प्याज, दाना ही Allaceae family (बार्यालजी में) की सब्जिया है। इनका जीनस (प्रजाति) Alltum है, लेकिन इनकी जाति अलग अलग है।
-ये
Allium sativum
T
प्याज का वैज्ञानिया न
Allium cepa
आयुर्वेद में तामसिक भोजन क्यों माना
जाता है लहसुन और प्याज को ?
आयुर्वेद में भोजन को गुणों के आधार पर 3 प्रकार का माना गया हैः सात्विक, राजसिक और तामसिक। आयुर्वेद मानता है कि भोजन करने के बाद जब उसका पाचन होता है और शरीर उन्हें जज्ब करता है तो इसान का बतव भी वैसा हो जाता है। लहसुन-प्याज उत्तेजना बढ़ाते है, शरीर में गर्मी पैदा करते है।
सब्जिया नाः इससे मन देता है। इसलिए इन्हें गया है। ध्यान, दम मददगार हैं।
राजसिक भोजनः चाय, कॉफी, प्याज, मसालेदार खाना आदि। इनसे ऐक्टिविटी, उत्तेजना और महत्वाकांक्षा बढ़ती है। इसलिए इन्हे राजसिक भोजन कहा गया है।
लहसुन की सादिष्ट चटनियां
सूखी लाल मिर्च वाली लहसुन की चटनी
इमाटर-लहसुन की चटनी
सामग्री: लहसुन की कलिया: 15-20 मुखी लाल मिर्च: 6-8 (भिगोई
सामग्री:
सामग्री:
जीरा: 1 चम्मद
नमकः आपा फमच
नीबू का रसः 1 चम्मच या बोह-सा इमली का गूदा
ऐसे बनाएं लाल मिर्च को 10-15 मिनट के लिए भिगोकर
लहसुन: 8-10 कलिया
टमाटरः 2 मीडियम साइज के
करी पत्ता: 5-7 पत्ते सरसों तेलः । चम्मच नमकः आधा चम्पब
राई: आधा चम्मच (स्वादानुसार) ऐसे चनाएं सरसों तेल गर्म करे, राई और करी पाउने अले। इसे 1 से 2 मिनाक उथहीने के लिए
तामसिक भोजनः नॉनवेज,
लहसुन, प्याज शराब, ज्यादा मसालेदार खानाः ये आलस्य, सेक्स की इच्छा और क्रोध आदि को बढ़ाते हैं।
लहसुन-मूंगफली की चटनी
(दक्षिण भारतीय शैली)
लहसुन 10-12 कलिया हरी मिर्च 2-3
लाल मिर्चः 2 सूखी या हरी मिर्च भूतफली 2 चम्मच (भुनी हुई नमेवर आधा मन
ऐसे बनाएं सभी चीजे मिक्सी या ल-बहे पर दरदरी पीस ले (फिर रस्ते का तेल डीले और मिसा करे। पराठा दाल-चावल के
अगर चटनी तने समय तक भोड़ा ज्यादा तेल और हल्का तेज घोड़ा और फ्रिज में रखें।
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