जल चिकित्सा | पानी पीने का कायदा और फायदा

पानी पीने का कायदा और फायदा


इन दिनों तपती गर्मी में हमारे शरीर को सबसे बड़ी प्यास पानी की होती है। जैसे-जैसे तापमान चढ़ता है, वैसे-वैसे पानी की जरूरत भी बढ़ती चली जाती है। लेकिन पानी केवल प्यास बुझाने भर का साधन नहीं है बल्कि सही वक्त पर, सही मात्रा में और सही तरीके से पिएं तो यह सेहत की संजीवनी बन सकता है। कब, कितना और कैसे पानी पिएं, एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं ।

अनूप पाण्डेय

कितना पानी पीना चाहिए

बड़ों को 14 साल या इससे ऊपर वालो को दिनभर में 25 से 3.5 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि यह जरूरत सबके शरीर, उम्र और काम करने के तरीके पर निर्भर करती है। जो ज्यादा पसीना बहाते है, उन्हें ज्यादा पानी पीना होती है।

बच्चों को 6 से 13 साल तक के बच्चों को रोजाना 15 से 2 लीटर पानी पीना चाहिए। बच्चों के लिए रंग-बिरंगी और खिलौने की तरह दिखने वाली बोतलों में पानी भरकर ऐसी जगह रखे जहां से वे आते-जाते पानी पी सकें। इसके अलावा उन्हें बीच-बीच में नीबू पानी, स्मूदी लस्सी शिकंजी, शेक दे सकते हैं।

★ 25-3.5 लीटर बड़ों के लिए

★ 1.5-2 लीटर 6 से 13 साल तक के बच्चों के लिए

अगर हो ऐसी कोई बीमारी...

किडनी, हार्ट और लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों में कम पानी पीने की सलाह दी जाती है क्योंकि शरीर में ज्यादा लिक्विड जमा हो सकता है जिससे सूजन, हाई ब्लड प्रेशर और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इस दौरान यूरिन आउटपुट के आधार पर डॉक्टर पानी पीने की सलाह देते हैं।

कितनी हो लिक्विड डाइट

सिर्फ पानी पीने के बजाय हमें पानी के साथ-साथ लिक्विड डाइट भी लेनी चाहिए लेकिन इसका रेश्यो 80:20 का रहे तो अच्छा होगा यानी 80 प्रतिशत पानी और 20 प्रतिशत लिक्विड डाइट होनी चाहिए जैसे स्मूदी, नींबू पानी, चने का सत्तू, लस्सी आदि। गर्मी में लिक्विड डाइट में मीठे लिक्विड के बजाय नमकीन लिक्विड डाइट लेना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि पसीने के रूप में हमारी बॉडी से सबसे ज्यादा सोडियम डिस्वार्ज होता है। नमकीन लिक्विड डाइट से शरीर में सोडियम की कमी नहीं होती जिससे थकान, चक्कर और डीहाइड्रेशन से बचाव होता है। इससे शरीर का इलेक्ट्रोलाइट का बैलंस बना रहता है और एनजी लेवल बेहतर रहता है।

पानी न कम लें, न ज्यादा

इन दिनों कई लोग जरूरत से ज्यादा पानी पीते है। दिन भर सिर्फ लिक्विड डायट ही लेते हैं। पानी हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी से हमारे शरीर के सेल्स डिहाइड्रेट हो जाते हैं और घातक डिहाइड्रेशन हो सकता है। है। इसकी वजह से हमे शॉक भी लग सकता है। लेकिन इसका यह मतलब बिलकुल नहीं है कि हम जरूरत से ज्यादा पानी पिएं। जब हम जरूरत से ज्यादा पानी पीते हैं तो यह खून में सोडियम स्तर को कम कर सकता है, जिसे हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं। इससे मस्तिष्क पर दबाव • बढ़ता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, मतली, थकान, भ्रम, मांसपेशियों में कमजोरी और गंभीर मामलों में दौरे या कोमा शामिल हो सकते है। ज्यादा पानी पीने से हमारी किडनी पर ज्यादा लोड पड़ता है। उसे ज्यादा पानी फिल्टर करना पड़ता है जो ठीक नहीं है।

गर्मियों में गर्म पानी नहीं।

कई लोग गर्मी के मौसम में भी गर्म पानी पीते रहते है ताकि उनका वजन कम हो। लेकिन यह ठीक नहीं है। इस मौसम में गर्म पानी पीने से शरीर में गर्मी पैदा होती है जो डिहाइड्रेशन कर सकती है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसका जितना फायदा होना है उससे ज्यादा नुकसान हो सकता है।

कितना होना चाहिए TDS ?

जब हम पानी पीते हैं तो यह जानना जरूरी है कि उस पानी का TDS कितना है? इससे पहले यह जान लेते हैं कि TDS है क्या? पानी में TDS का मतलब होता है
Total Dissolved Solids, यानी पानी में घुले हुए कुल ठोस पदार्थ जैसे- खनिज, नमक, धातुएं आदि। यह पीने के पानी की क्वॉलिटी का संकेत देता है।



पानी को फिल्टर करें इतना ही
TDS 50 से कम हो तो इसका मतलब है कि पानी से मिनरल्स से काफी हद तक निकल चुके हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए RO (Reverse Osmosis) तभी लगाएं जब पानी का TDS 300 से ज्यादा हो। कुछ RO मिनरल्स को वापस पानी में जोड़ने वाली टेक्नॉलजी के साथ भी आते हैं।


पानी पीने का सही वक्त जानना भी जरूरी

सुबह उठते ही: 
एक गिलास गुनगुना पानी पीना पाचन के लिए अच्छा होता है। इसकी जगह चाहें तो एक गिलास नॉर्मल (रूम टेपरेचर वाला) पानी भी पी सकते हैं। एक गिलास पानी में आधा नीबू निचोड़कर या उसमें शहद भी डालकर ले सकते हैं।

खाने से आधा घंटा पहले: 
जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उन्हें खाना खाने से आधा घंटा पहले पानी जरूर पीना चाहिए। अगर वे पहले पानी पी लेंगे तो पेट कुछ भरा रहेगा और वे ज्यादा खाना नहीं खा पाएंगे। इसकी जगह सूप या मट्ठा ले लें तो भी अच्छा रहेगा।

खाने के साथ पानी लेकर बैठेः 
अगर कोई खाना खा रहा है तो उसे अपने साथ पानी जरूर लेकर बैठना चाहिए। खाते वक्त गले में कुछ फंस जाए या हिचकी आए तो पानी को छूट-घूंट में ले सकते हैं।

खाना खाने के थोड़ी देर बादः 
खाना खाने के 30 से 45 मिनट बाद पानी पीना चाहिए क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार तुरंत पानी पीने से पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है जिससे खाना हजम नहीं हो पाता। मॉडर्न मेडिसिन का भी यही मत है कि खाने के तुरंत बाद पानी पीने से पेट में जो एंजाइम बनते हैं वे घुल जाते है जिससे खाना पच नहीं पाता।

एक्सरसाइज के बादः 
शरीर से निकलने वाले पसीने की भरपाई के लिए जरूरी है कि एक्सरसाइज के बाद पानी जरूर पिएं। गर्मी में नमक डालकर नीबू पानी ले सकते हैं।

सोने से पहले: 
एक गिलास पानी पीकर सोने से शरीर रातभर हाइड्रेटिड रहता है।

पानी पीने का सही तरीका

धीरे-धीरे पानी पिए: 
पानी को एकदम से न पिए, घुट-घूट कर धीरे-धीरे पिए। धीरे-धीरे पानी पीने से लार (सलाइवा) पानी में मिलती है जो पाचन को बेहतर बनाती है।

आराम से बैठकर पिएं: 
पानी आराम से बैठकर और अपने शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़कर पीना चाहिए। इससे पानी पूरे शरीर की कोशिकाओं में जाता है। जब हम खड़े होकर पानी पीते हैं तो हमारा शरीर तना हुआ यानी सख्त होता है जिससे पानी हमारी बॉडी के सेल्स में नहीं पहुंच पाता।

शरीर का तापमान सामान्य होने पर पिएं: 
जब हम गर्मी के मौसम में बाहर से घर में आते हैं तो तुरंत पानी न लें। यह जरूरी है कि शरीर का तापमान सामान्य होने पर ही पानी पिएं। औसतन 5 से 10 मिनट के भीतर शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है। लेकिन इस चक्कर में बहुत से लोग काफी देर तक पानी नहीं पीते जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति हो सकती है। इसलिए बाहर से आकर थोड़ी देर बाद पानी पीना न भूलें।

बहुत ठंडा या बहुत गर्म पानी न पिएं: 
बहुत ठंडा पानी पीने से बचे क्योंकि यह पाचन पर असर डाल सकता है। वहीं बहुत गर्म पानी पीना भी ठीक नहीं है।

प्यास को नजरअंदाज न करें: 
कभी अगर प्यास लगे तो उसे नजरअंदाज न करें, तुरत पानी पिएं। इन दिनों घर से बाहर जाना पड़े तो भरपूर पानी पीकर ही निकलें। यह डिहाइड्रेशन से बचाता है।

कैसे मटके का पानी पिएं:
सादा मटका ही खरीदें। केमिकल से पेंट किए गए मटके सुंदर दिखते हैं लेकिन इनका पानी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए जब भी मटका बाजार से खरीदें तो ध्यान दें कि इसे सिंथेटिक कलर से पेट न किया गया हो। वहीं जब मटका एक साल पुराना हो जाए तो इसे नींबू या विनेगर से अंदर और बाहर दोनों ओर से अच्छी तरह से साफ करें।

किस बर्तन में पानी स्टोर करेंः 
पानी को हमेशा स्टेनलेस स्टील, कांच की बोतल या मिट्टी के बर्तन में स्टोर करना चाहिए। इन बर्तनों में पानी लंबे समय तक साफ रहता है और बैक्टीरिया पनपने की संभावना कम होती है। आयुर्वेद के अनुसार, तांबे और चांदी के बर्तन में पानी रखना फायदेमंद माना गया है।

अल्कलाइन वॉटर क्यों ?

इन दिनों लोगों में पानी को अल्कलाइन करके पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। पानी को अल्कलाइन करने का मतलब है, कि उसके PH लेवल को बढ़ाकर उसे ज्यादा क्षारीय बनाना। सामान्य पानी का PH लगभग 7 होता है जबकि अल्कलाइन पानी का PH 8 से 9 के बीच होता है। ऐसी कोई रिसर्च नहीं है जिससे यह पता चलता हो कि अल्कलाइन वॉटर सभी के लिए फायदेमंद है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो एसिडिटी, पेट के अल्सर की समस्या से जूझ रहे हैं।

ज्यादा प्यास या यूरिन डिस्चार्ज हमेशा डिहाइड्रेशन नहीं: 
कई बार ज्यादा यूरिन डिस्चार्ज होना, ज्यादा प्यास लगने की स्थिति को लोग डिहाइड्रेशन समझ लेते हैं लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है। यह लक्षण डायबिटीज या मानसिक तनाव से भी जुड़े हो सकते हैं।

डायबिटीज में क्या होता है?: 
डायबिटीज होने पर शरीर में इंसुलिन का सही स्तर नहीं रहता। इससे शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। जब ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो किडनी इसे फिल्टर करने की कोशिश करती है जिससे बार-बार यूरिन आना और ज्यादा प्यास लगनी शुरू हो जाती है। इसके अलावा कमजोरी, थकान और वजन घटने जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

तनाव में क्या होता है?
जब कोई व्यक्त्ति ज्यादा मानसिक तनाव में होता है। है तो उसे बार-बार प्यास लग सकती है और पेशाब भी अधिक आ सकता है। इस तंत्र भी गड़बड़ा जाता है। मेटल स्ट्रेस की वजह से भी शरीर में पानी की मांग बढ़ जाती है जिससे उस शख्स को ज्यादा प्यास लग सकती है और ज्या ज्यादा यूरिन डिस्चार्ज होता है। एग्जाइटी की स्थिति में ऐसा होता रही है, ज्यादा यूरिन आ रहा है तो किसी डॉक्टर से सलाह लें।

उचित मात्रा में जल सेवन
अमृत समान

पानी ना सिर्फ गर्मियों का अमृत है बल्कि जीवन का पर्याय भी है। इसकी एक-एक घंट आपके तन-मन को शीतलता प्रदान करने के साथ पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या से भी बचाती है। लेकिन गर्मी के मौसम में कितना पानी पीना चाहिए जिससे शरीर को स्वस्थ रखा जा सके। चूंकि शरीर में पानी की अधिकता उतनी ही नुकसानदायक है जितनी कमी।

इस संबंध में राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. सुभाष गिरी से बात की तो उन्होंने बताया कि शरीर को जब भी पानी की जरुरत होती है वह खुद मांग लेता है। ऐसे में आपको प्यास लगने लगती है और आप शरीर की जरूरत के मुताबिक पानी पी लेते हैं। हालांकि एक स्वस्थ शरीर को रोजाना ढाई से तीन लीटर पानी की जरुरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि जब रक्त धमनियों (ब्लड वेसल्स) में तरलता या प्रोटीन की मात्रा कम होने लगती है तब हमारा शरीर आवश्यकता महसूस करने लगता है और पानी की मांग करता है।

अगर आप शारीरिक गतिविधियां ज्यादा करते हैं या बाहर धूप में काम करते हैं, तो आपको और अधिक पानी की जरूरत पड़ेगी। पसीना निकलने के कारण शरीर में के पानी की कमी हो सकती है। उमस और गर्मी वाले वातावरण में काम करने वाले व्यक्ति को 3-4 लीटर पानी की जरूरत हो सकती है। डॉ. में गिरि ने कहा, जब मौसम का तापमान 40 डिग्री से अधिक हो तब बाहर ना निकलें। अगर निकलना जरूरी हो तो छाता और पानी साथ लेकर बाहर निकलें। इस दौरान हवादार और ठंडी जगहों पर रहने की कोशिश करें।

भीषण गर्मी में रखें ख्याल

पानी पीने के हैं कई लाभ
पानी की कमी से थकान, चक्कर आना, सिरदर्द और मुंह सूखने जैसी समस्याएं होती हैं। कई बार डिहाइड्रेशन की वजह से बेहोश होने की आशंका भी बढ़ जाती है। पाचन के लिए भी पानी बेहद जरूरी होता है। कम पानी पीने से कब्ज की शिकायत होना बहुत आम बात है। ऐसे में गर्मियों के मौसम में रोजाना भरपूर पानी पीना चाहिए।

कम पानी पीने के नुकसान
कम मात्रा में पानी पीने से शरीर में किडनी पर दबाव पड़ता है और किडनी स्टोन या यूरिन इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज 2-3 लीटर पानी पीना चाहिए। वहीं ज्यादा पानी पीने से किडनी को ज्यादा काम करना पड़ता है। उसकी क्षमता में भी कमी आती है। चूंकि किडनी पानी की मदद से ही शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।

एनर्जी ड्रिंक या कोल्ड ड्रिंक से दूरी
गर्मी के मौसम में लोग अक्सर एनर्जी ड्रिंक और कोल्ड ड्रिंक का सेवन करते हैं। इससे प्यास बढ़ती है और पेशाब ज्यादा आता है जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इनमें शुगर और कैफीन होते हैं जो ब्रेन को बूस्ट करके तत्काल एनर्जी भी देते हैं। लेकिन दीर्घावधि में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी साबित होते हैं। विशेषकर बच्चों को इससे दूर रखें।

गर्मी में छाछ, नींबू पानी फायदेमंद
इन दिनों प्रचंड गर्मी का मौसम चल रहा है। तपन के इस भीषण मौसम में जब बार-बार गला सूखता है तो पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने के साथ नींबू का पानी, नारियल पानी, छाछ, सत्तू, शिकंजी और आम पन्ना जैसे पेय पदार्थ फायदेमंद रहते हैं।

संतोष सूर्यवंशी

हार्ट, किडनी, लिवर रोगी पिएं कम पानी
डॉ. सुभाष गिरी ने बताया कि हार्ट, किडनी या लिवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती। उनके लिए एक लीटर से भी कम पानी (प्रतिदिन) की की मात्रा पर्याप्त है। उन्हें नमक का सेवन कम करना चाहिए, सामान्य से ज्यादा नमक खाने से उन्हें शरीर में सूजन की समस्या हो सकती है।

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