बीज का गणित

सेहत की बेहतरी की शुरुआत जितनी जल्दी करें, उतना बढ़िया। यहां तक कि दांपत्य जीवन के आरंभ से ही इसकी शुरुआत कर सकते हैं। हेल्दी मां के हेल्दी एग व यूटरस और हेल्दी पिता के हेल्दी स्पर्म से ही बच्चे के सेहतमंद जीवन का बीज पड़ता है। पर ये सब कैसे रहें हेल्दी ? किन वजहों से ये होते हैं कमजोर ? बेहतरीन एक्सपर्ट्स से बातकर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती

बीज गणित

हेल्दी स्पर्म में होता है ये-ये

प्रेग्नेंसी से पहले सीमन एनालिसिस करवाकर स्पर्म क्वॉलिटी देख सकते हैं। यह टेस्ट खासकर उनके लिए बढ़िया है जो 1 साल तक चाहने पर भी पिता नहीं बन पा रहे। इससे प्रेग्नेंसी आसान होती है:

★ Total Sperm Count => 1.5 करोड़/ml या उससे ज्यादा
★ Motility => 40% से ज्यादा ऐक्टिव
★ Morphology => 4% से ज्यादा सामान्य आकार वाले स्पर्म
★ PH Level => 7.2 से 8.0 के बीच
★ DNA -Fragmentation => 15% से कम DNA फ्रेगमेंटेशन। इससे ज्यादा होने पर मिसकैरिज का खतरा रहता है।

ध्यान दें – अगर इनमें कमी हो तो प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी आ सकती है। स्पर्म काउंट 50 लाख तक भी हो तो भी कुदरती तरीके से प्रेग्नेंसी कंसीव हो सकती है।

हेल्दी एग में होता है ये-ये

प्रेग्नेंसी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट करवाकर ओवम की क्वॉलिटी का पता लगाया जा सकता है। इससे प्रेग्नेंसी के लिए सही समय का भी पता चल जाता है। इससे प्रेग्नेंसी आसान होती है:

★ AMH (Anti-Mullerian Hormone) => 1.0-4.0 ng/ml
★ Estradiol - E2 => 30-50 pg/ml
★ FSH (Follicle-Stimulating Hormone): => 3-10 IU/L
★ Ultrasound-AFC Test => 6-10 फॉलिकल्स प्रति ओवरी
★ Progesterone => ओवुलेशन के बाद 10-20 ng/ml

ध्यान दें – 
अगर टेस्ट में AMH हॉर्मोन कम हो या FSH हॉर्मोन ज्यादा हो तो यह अंडाणु यानी एग की क्वॉलिटी में कमी का संकेत हो सकता है। इससे भी प्रेग्नेंसी में मुश्किल आ सकती है।

जब होता है फर्टिलाइजेशन

यह सुनने में आसान लगता है कि फर्टिलाइजेशन स्पर्म और ओवम के मिलने से हो जाता है। लेकिन असल में यह इतना आसान नहीं होता। पुरुष के एक बार के डिस्चार्ज में करीब 5 करोड़ तक स्पर्म होते हैं। इनमें से कोई एक ही एग यानी अंडाणु (फीमेल को पीरियड्स में एक महीने में अमूमन एक ही एग निकलता है।) के भीतर प्रवेश कर पाता है। बाकी स्पर्म का काम एग की सख्त दीवार को तोड़ने का होता है। जब एक बार यह दीवार टूट जाती है तो अमूमन जो सबसे तेज स्पर्म होता है, वह अपनी टेल यानी पूंछ के बिना सिर्फ हेड के साथ ओवम के अंदर प्रवेश कर जाता है। इसके अंदर पहुंचते ही ओवम की दीवार फिर से सख्त हो जाती है ताकि कोई दूसरा स्पर्म फिर अंदर न पहुंच सके। क्यों है न कुदरत का नायाब करिश्मा ! स्पर्म के अंदर पहुंचने का मतलब है कि हो गया और भ्रूण का निर्माण हो गया। एक बार भ्रूण बन जाए तो फिर यह यूटरस यानी गर्भाशय में आकर चिपक जाता है और फिर यहां पर वह करीब 9 महीने तक विकसित होता रहता है और 9 महीने के बाद बच्चे के रूप में पैदा होता है। यह है सामान्य स्थिति। अगर पुरुष के की शुक्राणुओं की संख्या कम हो या उसकी स्पीड कम हुई या फिर शुक्राणु ही कमजोर हुआ तो कई बार फर्टिलाइजेशन मुश्किल जाता है। वहीं अगर महिला के अंदर अंडाणु ही न बने अगर बने भी तो कमजोर बने या फिर यूटरस में कोई सिस्ट या गांठ हो या दूसरी परेशानी तो भी प्रेग्नेंसी मुश्किल है जाती है। इसलिए इन सबका सेहतमंद होना जरूरी है।

हेल्दी होना इसलिए जरूरी

बच्चे के हेल्दी पैदा होने में माता और पिता, दोनों की अहम भूमिकाएं होती है। मां की भूमिका थोड़ी ज्यादा इसलिए होती है क्योकि उसे करीब 9 महीनों तक बच्चे को गर्भाशय में पालना होता है। इसलिए महिला का ओवम और यूटरस, दोनों हेल्दी होने चाहिए। अगर एक में भी समस्या हो तो बच्चा होने में परेशानी हो सकती है या फिर वह पूरी तरह  से सेहतमंद नहीं होगा तो बच्चा होने में परेशानी होगी। यहां इस बात को समझना भी जरूरी है कि होने वाला बच्चा लड़का होगा या लड़की। यह पुरुष के XY स्पर्म से तय होता है न कि महिला के एग से। 

वहीं अगर पुरुष का स्पर्म कमजोर हो तो फर्टिलाइजेशन यानी निषेचन में ही मुश्किल होगी और अगर मिलन किसी तरह से हो भी जाए तो कई बार मिसकैरिज यानी गर्भपात का खतरा रहता है। अहम बात यह कि कई बार शरीर यानी पानी कुदरत ही खराब भ्रूण को मिसकैरिज के माध्यम से बाहर निकाल देता है। अगर बच्चा 9 महीने मां के गर्भ में गुजार ले तो कमजोर स्पर्म की वजह से उसकी इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है या फिर न्यूरो से संबंधित बिमारी का खतरा भी हो सकता है।

क्या-क्या खतरे हो सकते हैं प्रेग्नेंसी की राह में?



5 सबसे खास बातें...

1. हेल्दी स्पर्म और हेल्दी ओवम के साथ 1 हेल्दी यूटरस से ही सेहतमंद बच्चा पैदा होता है।
2. स्पर्म और ओवम की क्वॉलिटी खराब 2) करने में स्ट्रेस, नशा, गलत डाइट और ओबेसिटी अहम भूमिका निभाते हैं।
3. कई बार बेकाबू डायबीटीज, सिस्ट आदि की वजह से भी स्पर्म या ओवम की क्वॉलिटी खराब होती है।
4. करियर की वजह से या दूसरी वजहों से जब उम्र ज्यादा हो जाती है तो भी स्पर्म और ओवम की क्वॉलिटी खराब होती है।
5. महिलाओं के लिए मां बनने की आदर्श उम्र 25 से 27 साल और पुरुषों के लिए पिता बनने की आदर्श उम्र 27 से 32 साल है।

लाखों में इक को मुकद्दर में जगह मिलती है, 
शुक्राणु की दौड़ भी कुछ-कुछ ऐसे ही चलती है।

लड़कों में क्यों आते हैं बदलाव

लड़कों में प्यूबर्टी (जब बच्चा टीनएज में आता है तो आवाज बदलना, दाढ़ी-मूठे आदि आना।) के बाद जब स्पर्म बनने शुरू होते है तो उनके शरीर में कई तरह के बदलाव दिखने लगते हैं। एडल्ट होने के बाद वे सेक्स के लिए तैयार होते हैं। सेक्स के दौरान सीमन में मौजूद करोड़ों शुक्राणुओं यानी स्पर्म में से कोई एक ही ओवम में एंट्री कर पाता है और इसके बाद भ्रूण बन पाता है। यह सामान्य स्थिति है।



लड़कियों में क्यों आते हैं बदलाव

प्यूबर्टी (पीरियड्स आने लगते हैं और अंडाणु बनने शुरू हो जाते हैं) के बाद सामान्य तौर पर पीरियड्स के पहले दिन से जोड़कर 14वें दिन एग ओवरी से निकलता है। यह तब होता है जब पीरियड्स की साइकल 28 दिनों की हो। इसलिए जब किसी फीमेल की प्रेग्नेसी कंसीव करने का वक्त आए तो पीरियड्स के पहले दिन से जोड़ते हुए 8वे से 18वें दिनो के बीच के अंतराल को प्रेग्नेंसी के लिए सबसे ज्यादा मुफीद बताया जाता है। इस दौरान एग ओवरी से निकलकर गर्भाशय और ओवरी से जुड़ी हुई फेलोपियन ट्यूब में पहुंचता है। एग की लाइफ ओवरी से निकलने के बाद 6 से 8 घंटे की होती है। इस दौरान फेलोपियन ट्यूब में अगर स्पर्म यानी शुक्राणु (शरीर के बाहर 2 से 3 घंटे, शरीर के भीतर करीब 24 घंटे और लैब में 2 से 3 दिन) मौजूद हो (यह तब होता है जब इसी दौरान सेक्स किया गया हो) तो फर्टिलाइजेशन हो जाता है।

ये हैं तकनीकी और हार्मोनल वजहें

ज्यादा उम्र में प्रेग्नेंसी की प्लानिंग करना

करियर बनाना बेहद जरूरी है, पर सही उम्र में पिता और मां बनना भी जरूरी है। उम्र निकल जाने के बाद शरीर में अंग कमजोर होने लगते हैं। स्वाभाविक तौर पर स्पर्म और ओवम की स्थिति भी कमजोर हो जाती है। पुरुषों में स्पर्म की संख्या कम होने लगती है। वहीं महिलाओं के पीरियड्स डिस्टर्ब हो जाते हैं। प्रेग्नेंसी के लिए यूटरस का मुलायमपन भी कम होने लगती है। इससे प्रेग्नेंसी मुश्किल हो जाती है।

क्या करें: महिलाएं 25 से 27 साल की उम्र तक मां बन जाएं तो बेहतर है और पुरुष 28 से 32 साल की उम्र तक पिता बन जाएं। इस उम्र तक अमूमन करियर भी बन जाता है। अगर देरी हो भी गई हो तो भी ज्यादा नहीं घबराना चाहिए। हकीकत यह है कि आज 10 में से 2 इन्फर्टिलिटी के मामलों में ही दूसरे स्पर्म या ओवम लेने की जरूरत पड़ती है। अगर ओवरी में ओवम बन रहा हो और टेस्टिस में स्पर्म, भले ही एग फेलोपियन ट्यूब तक न पहुंचता हो और स्पर्म की संख्या और उसकी गति कम हो यानी इन्फर्टिलिटी पूरी तरह से न हो तो ऐसी स्थिति में IVF भी प्रेग्नेंसी कराने में सक्षम है।

थायरॉइड, शुगर और BP होना

अगर किसी को इनमें से कोई बीमारी है तो ज्यादा सचेत होने की जरूरत है। ये भी कमजोरी पैदा करते हैं।
क्या करें: इन्हें काबू में रखें। दवा लेते रहें और अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें।

PCOS की दिक्कत

इसे Polycystic Ovary Syndrome कहते हैं। यह परेशानी महिलाओं को होती है। इसकी वजह से एग बनने की प्रक्रिया में रुकावट आती है। इस तरह की परेशानी आजकल काफी देखी जाती है।

क्या करें: इसका इलाज कराएं। अपनी गाइनी डॉक्टर की सलाह मानें। इलाज के बाद ही प्रेग्नेंसी के लिए जाएं। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि यूटरस गर्भधारण के लायक न हो तो IVF (लैब में फर्टिलाइजेशन कराकर) से प्रेग्नेंसी कंसीव कराई जा सकती है।

वेरिकोसिल की परेशानी होना

इसमें टेस्टिस की नसों की सूजन से शुक्राणु की क्वॉलिटी खराब हो सकती है। इसे Varicocele कहते है। वैसे इस तरह के मामले बहुत कम होते हैं पर पुरुषों में यह समस्या कभी-कभी हो सकती है।

पलूशन में रहना

पलूशन का असर सिर्फ सांस या स्किन पर ही नहीं, बल्कि फर्टिलिटी पर भी पड़ सकता है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लागू होता है। बड़े शहरों में यह बड़ा मुद्दा है। यह स्मोकिंग जैसा ही नुकसान करता है। इससे ओवम की क्वॉलिटी कम हो सकती है और स्पर्म काउंट भी गिर सकता है।

क्या करें: जब पलूशन का लेवल ज्यादा हो तो कम से कम बाहर निकले। मास्क लगाएं। हेल्दी डाइट लें ताकि ज्यादा मात्रा में ऐटिऑक्सीडेंट बने।

पक्ड फूड आइटम्स और जंक फूड 
ये फूड आइटम्स (नूडल्स, चिप्स, कुरकुरे, समोसे, रिफाइंड और मैदे से बने प्रोडक्ट) स्वाद में भले ही लजीज हों, पर सेहत बिगाडते हैं। ये ऐंटिऑक्सिडेंट बहुत कम बनाते हैं, लेकिन फ्री रेडिकल्स बहुत ज्यादा बना देते हैं। इससे शरीर कमजोर होता जाता है। पाचन तंत्र भी कमजोर होता है। इम्यूनिटी कम हो जाती है। सबसे अहम बात यह कि हम मोटे होते जाते हैं।

क्या करें: वैसे तो इन्हें खाना ही नहीं चाहिए। पर मन को मनाना मुश्किल होता है। इसलिए महीने में एक बार से ज्यादा न लें। अगर प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हों तो पुरुष और महिला दोनों ऐसी चीजों को कम से कम 2 से 3 महीने पहले छोड़ दें।

मोटापा होना

वजन को काबू में रखना सिर्फ सेक्शुअल हेल्थ के लिए ही नहीं, सामान्य सेहत के लिए भी जरूरी है। कई बार मोटापे की वजह से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन (सेक्स हॉर्मोन) प्रभावित होता है। वहीं महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन डिस्टर्ब होने लगता है। यूटरस और ओवरी की हेल्थ पर भी असर पड़ता है। कई बार ओवरी में सिस्ट बनने की वजह मोटापा होता है।

क्या करें: वजन काबू में रखें। डाइट और एक्सरसाइज का ध्यान रखें। अगर प्रेग्नेंसी कंसीव करनी हो तो हर दिन 20 से 30 मिनट तक एक्सरसाइज काफी है। बहुत ज्यादा न करें। एक्सरसाइज करने से हर शख्स तंदुरुस्त होता है। महिला फिट होती है। ऐसे ही उनका स्पर्म या ओवम भी हेल्दी होता है।

ज्यादा गर्मी में रहना

ऐसे कई पेशे हैं जिनमें लगातार गर्मी में रहना पड़ता है, चाहे वह कुकिंग हो या धूप में लगातार, रहना। कई बार पुरुषों के टाइट अंडरवियर पहनने से या पैरों पर काफी देर तक लैपटॉप रखकर काम करने से स्पर्म की हेल्थ पर असर पड़ता है। कुछ लोग सोचते हैं कि नॉनवेज ज्यादा खाने से ज्यादा स्पर्म बनते हैं जोकि पूरी तरह गलत है। अगर टेस्टिस को लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान सहना पड़े तो स्पर्म का उत्पादन कम हो सकता है। इसीलिए तेज बुखार आने पर स्पर्म काउंट अस्थायी तौर पर घट जाता है।

क्या करें: ज्यादा टाइट अंडरवियर न पहनें। खाना सामान्य हो तो बेहतर। अगर गर्मी का मौसम है तो ज्यादा हेवी यानी तेल-मसाले वाला खाना खाने और नॉनवेज आदि से बचें। अगर कोई बीमार है या बुखार है तो उस दौरान प्रेग्नेंसी के बारे में न सोचें।

नशा करना

चाहे अल्कोहल लेने की लत हो या फिर सिगरेट पीने की, किसी भी तरह का नशा शरीर के साथ मन भी कमजोर करता है। ये शुक्राणुओं की संख्या भी घटाते हैं। उनकी रफ्तार भी कम करते हैं। दूसरी ओर महिलाओं में कई बार ये सिस्ट बनने की वजह बनते हैं। कई तरह के सेक्स हॉर्मोन डिस्टर्ब होते हैं।

क्या करें: स्वाभाविक है नशे से दूरी ही इसके बुरे असर से बचने का तरीका है। अगर पूरी तरह से बंद करना मुश्किल हो रहा हो तो किसी क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट या फिर सायकायट्रिस्ट की मदद ले सकते हैं। कम से कम प्रेग्नेंसी से 3 से 5 महीने पहले पुरुषों को और महिलाओं को बच्चे के मां का दूध पीने तक नशा बिलकुल नहीं करना चाहिए।


स्ट्रेस और नींद की कमी

ऐसा कोई शख्स नहीं हो सकता कि उसे स्ट्रेस न हो, बशर्ते कि वह जिंदा हो और मानसिक रूप से सेहतमंद हो। अगर हमें स्ट्रेस को हैंडल करना आ जाए तो यह फायदा देता है। लेकिन इसे संभालना न आए तो यह परेशान करता है। हम प्रफेशनली, फिजिकली और मेंटली डिस्टर्ब होते हैं। स्ट्रेस की वजह से हमारे शरीर में हॉर्मोन का स्तर बिगड़ जाता है। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में प्रोजेस्ट्रॉन व एस्ट्रोजन का लेवल भी डिस्टर्ब होनें लगता है। इन सभी का असर शरीर में बनने वाले स्पर्म और ओवम पर भी होता है। उनकी सेहत बिगड़ने लगती है। स्पर्म की संख्या कम होने लगती है, वहीं महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। ओवरी से ओवम निकलने की साइकल बदलने लगती है। ओवम की क्वॉलिटी खराब होने लगती है।

क्या करें: अगर स्ट्रेस खुद हैंडल कर पा रहे हैं तो बढ़िया है। अगर अपने रुटीन काम भी सही तरीके से नहीं कर पा रहे और ऐसा महीने में एक-दो दिन नहीं, लगातार हो तो निदान जरूरी है। किसी सायकायट्रिस्ट या फिर क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट की मदद ले सकते हैं। जितने दिन स्ट्रेस में गुजारेंगे, शरीर पर इसका असर होगा। इन अंगों में पुरुष का टेस्टिस (जहां स्पर्म पैदा होता है) और महिलाओं की ओवरी (जहां एग बनता है) व यूटरस भी शामिल हैं।

सही डाइट न लेना
अगर सही डाइट नहीं लेते हैं तो शरीर में कई तरह के विटामिन्स और मिनरल्स की कमी होगी। शरीर में आयरन की कमी होगी तो हीमोग्लोबिन भी कम होगा। देश की ज्यादातर महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) ग्रसित होती हैं।

ऐसी हो डाइट

1. हर हफ्ते भोजन की प्लानिंग बनाएं।
2. यह कोशिश करें कि 7 दिनों में 7 रंग की सब्जियों और फलों का सेवन करें।
3. हर दिन खाने में 2 कटोरी सब्जी और 2 मौसमी फल जरूर शामिल हों।
4. हर दिन एक प्लेट मौसमी सलाद भी जरूर लें, जिसमें 6 चुकंदर, गाजर, ककड़ी, खीरा, टमाटर आदि शामिल हो।

5 प्रोटीन भी सही मात्रा में खाने में शामिल करें। अगर किडनी आदि की परेशानी न हो तो हर दिन 40 से 60 ग्राम प्रोटीन जरूर खाना चाहिए। यह पनीर, दूध, अंडा आदि रूप में ले सकते हैं।

6. इनके अलावा सीड (फ्लैक्स सीड, पंपकिन सीड) और नट्स (4 बादाम या 1 अखरोट) भी जरूर खाने चाहिए।

7. अंकुरित मूंग या चने भी काफी फायदेमंद हैं।

यह डाइट पुरुष और महिला, दोनों की सामान्य सेहत और सेक्शुअल हेल्थ के लिए जरूरी है। इसमें भरपूर मात्रा में ऐंटिऑक्सिडेंट (भोजन पचने के बाद शरीर में बनने वाली सबसे उपयोगी चीज) मिलते हैं। ये पेंटिऑक्सिडेंट फ्री रेडिकल्स (भोजन पचने के बाद शरीर में बनने वाली सबसे हानिकारक चीज) के असर कम करते हैं। जितने ज्यादा फ्री रेडिकल्स बनेंगे, उतना ही कमजोर स्पर्म और कमजोर ओवम का खतरा होगा। ज्यादा ऍटिऑक्सिडेंट बनेगे तो ये मजबूत होकर उभरेगे। इसलिए सही डाइट और लाइफस्टाइल हेल्दी स्पर्म और ओवम बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

आयुर्वेद में भी है समाधान

शुक्राणु की दौड़ हो या दुनिया का हाल, जो सबसे तेज भागा, उसी का कमाल।

आयुर्वेद में शुक्र धातु को खास माना गया है। ये हैं शरीर की कुल 7 धातुएं जिनका निर्माण पिछली धातु से जुड़ा हैः

1. रसः यह प्लाज्मा बनने से जुड़ा है।
2. रक्तः ब्लड बनने की बात है।
3. मांसः मांसपेशियां बनाने के बारे में है।
4. मेदः यह फैट बनाने की बात करता है।
5. अस्थिः यह हड्डियों की मजबूती के बारे में है।
6. मज्जाः इसे अस्थिमज्जा यानी बोन मैरो और नर्वस सिस्टम समझ सकते हैं।
7. शुक्रः आयुर्वेद के मुताबिक, इसका निर्माण मज्जा से होता है। यह रिप्रोडक्शन से जुड़ा है।

इनके सेवन से सेहतमंद शुक्राणु, अंडाणु और गर्भाशय देसी घी और दूध का सेवन करना आयुर्वेद में गुणकारी माना गया है। इनके सेवन से स्पर्म और ओवम की क्वॉलिटी अच्छी होती है। अगर हमेशा इनका सेवन नहीं करना चाहते हों तो प्रेग्नेंसी कंसीव करने से 2 से 3 महीने पहले शुरू कर देना चाहिए और आगे भी करना चाहिए। इनके सेवन से स्पर्म तेज होता है और यूटरस भी प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हो पाता है।

★ उड़द की दाल भी कारगर है। यह भी सीमन की क्वॉलिटी बढ़ाती है।
★ तिल के तेल को आयुर्वेद मे बेहतरीन कहा गया है। इनके सेवन से भी फायदा होता है।
★ 2 से 3 खजूर या 2 अंजीर का सेवन करना भी फायदेमंद हो सकता है।
★ उत्तम संतान के लिए फल में अनार का सेवन करना फायदेमंद होता है।
★ कुछ रसायन है जिनका सेवन वैद्य की सलाह से करना चाहिएः मसलनः अश्वगंधा, शतावरी, गोखरू, शिलाजीत, सफेद मूसली, कौंच बीज आदि।
★ अशोक, शतावरी का सेवन महिलाओं के लिए फायदेमंद बताया गया है।
★ जब प्रेग्नेंसी कंसीव करने की प्लानिंग कर रहे हो तो खट्टी और तीखी चीजों से बचना चाहिए।
★ हर दिन पुरुष और महिला को 15 से 20 मिनट योग (मेडिटेशन, प्राणायाम) करना चाहिए।


Comments

Popular posts from this blog

नाभि हटना / धरण हटना (Navel Displacement / Nabhi Chakra Vikriti)

नींद

स्वर चिकित्सा